BII का जलवा! क्लाइमेट फाइनेंस में ₹1.1 बिलियन पार, अब Turno कंपनी भारत में दौड़ाएगी इलेक्ट्रिक बसें

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AuthorMehul Desai|Published at:
BII का जलवा! क्लाइमेट फाइनेंस में ₹1.1 बिलियन पार, अब Turno कंपनी भारत में दौड़ाएगी इलेक्ट्रिक बसें
Overview

ब्रिटिश इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट (BII) ने भारत में क्लाइमेट फाइनेंस (Climate Finance) के लिए अपना $1 बिलियन का लक्ष्य पार कर लिया है। कंपनी ने कुल **$1.1 बिलियन** से ज़्यादा का निवेश किया है, जिसमें भारतीय EV कंपनी Turno को **₹43 करोड़** दिए गए हैं। इस पैसे से Turno अपनी नई इलेक्ट्रिक बस सर्विस शुरू करेगी।

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भारत के डीकार्बोनाइजेशन (decarbonization) लक्ष्यों को हासिल करने में ब्रिटिश इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट (BII) एक अहम भूमिका निभा रहा है। कंपनी ने भारत में क्लाइमेट फाइनेंस (Climate Finance) के लिए अपने $1 बिलियन के कमिटमेंट को पार करते हुए अब तक कुल $1.1 बिलियन से ज़्यादा का निवेश किया है। इस बड़ी उपलब्धि के साथ, BII ने भारतीय EV इन्फ्रास्ट्रक्चर और बैटरी लाइफसाइकिल कंपनी Turno में ₹43 करोड़ (लगभग $5.2 मिलियन) का बड़ा निवेश किया है।

इस फंडिग का सीधा असर Turno के नए इलेक्ट्रिक बस (e-bus) बिज़नेस यूनिट 'ElectricGo' पर पड़ेगा। इस पैसे से पूरे भारत में 34 इंटरसिटी इलेक्ट्रिक बसों को फाइनेंस किया जाएगा, जो देश के पब्लिक और कमर्शियल ट्रांसपोर्ट को और ज़्यादा ग्रीन बनाने में मदद करेगा। BII ने 2024 में भी Turno में निवेश किया था, और यह नया निवेश दोनों के बीच बढ़ते भरोसे को दिखाता है। BII की एमडी शिल्पा कुमार ने कहा कि भारत BII की क्लाइमेट इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

भारत सरकार 2070 तक नेट-जीरो (Net-Zero) एमिशन हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है, और BII का यह निवेश क्लीन एनर्जी और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (e-mobility) को बढ़ावा देगा। गाड़ियों से होने वाले ग्रीनहाउस गैस एमिशन (greenhouse gas emissions) को कम करने में इलेक्ट्रिक बसों की अहम भूमिका है। भारतीय इलेक्ट्रिक बस मार्केट के 18-23% CAGR से बढ़ने का अनुमान है और 2030 तक इसके $2.4 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है। सरकार की FAME-II और PM-eBus Sewa जैसी स्कीम्स इसमें बड़ा योगदान दे रही हैं।

Turno की खास बात यह है कि यह EV बैटरी के लाइफसाइकिल इंटेलिजेंस (lifecycle intelligence) और सेकंड-लाइफ बैटरी डिप्लॉयमेंट (second-life battery deployment) पर काम करती है। इसके ज़रिए, पुरानी EV बैटरियों को एनर्जी स्टोरेज सॉल्यूशन्स के तौर पर इस्तेमाल करके एसेट वैल्यू (asset value) बढ़ाई जाती है और ओनरशिप कॉस्ट (ownership cost) कम की जाती है। यह ऐसे समय में अहम है जब लंबी कंसेशन अवधि (concession period) और छोटी फाइनेंसिंग टर्म्स (financing terms) के बीच कैश फ्लो (cash flow) का मिसमैच एक बड़ी चुनौती है।

BII का भारत में क्लीन एनर्जी और EV सेक्टर में बड़ा एक्सपोजर (exposure) रहा है। कंपनी ने पहले भी Mahindra and Mahindra की EV यूनिट में $250 मिलियन तक का निवेश किया है और GreenCell Mobility जैसे इलेक्ट्रिक बस ऑपरेटरों को भी फंड किया है। BII की भारत में अब तक कुल $2.2 बिलियन की वैल्यू का पोर्टफोलियो (portfolio) है, जिसमें बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम्स (BESS) और ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट्स (transmission projects) भी शामिल हैं। BII आने वाले सालों में भारत में हर साल $600–700 मिलियन का निवेश करने की योजना बना रहा है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.