Avaada Group का बड़ा कदम: ₹12,800 करोड़ का लोन पक्का, ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स को मिलेगी रफ्तार

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Avaada Group का बड़ा कदम: ₹12,800 करोड़ का लोन पक्का, ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स को मिलेगी रफ्तार

Avaada Group ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), केनरा बैंक और REC के साथ ₹12,800 करोड़ का फाइनेंसिंग एग्रीमेंट फाइनल किया है। यह फंड 2.15 गीगावाट (GW) ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स के लिए है, जो गुजरात और महाराष्ट्र में सोलर और हाइब्रिड क्षमता का निर्माण करेंगे।

Avaada Group ने एक बड़ी फाइनेंसिंग डील फाइनल की है, जिसके तहत उन्हें लगभग ₹12,800 करोड़ का टर्म लोन पैकेज मिला है। यह फंड स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), केनरा बैंक और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉर्पोरेशन (REC) के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम से आया है। यह फाइनेंसिंग 2.15 गीगावाट (GW) नई रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता के विकास में मदद करेगी, जो भारतीय ग्रीन एनर्जी सेक्टर में इस साल के सबसे बड़े डेट-फैसिलिटी डील्स में से एक है।

प्रोजेक्ट्स और क्षमता

यह पैसा ग्रुप की चार सब्सिडियरी कंपनियों के लिए है। इसमें 1.35 GW हाइब्रिड रिन्यूएबल एनर्जी और 800 MW सोलर पावर क्षमता शामिल है। कंपनी के मुताबिक, इन प्रोजेक्ट्स के लिए महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी और गुजरात ऊर्जा विकास निगम के साथ पावर परचेजिंग एग्रीमेंट (PPA) पहले ही साइन हो चुके हैं।

फाइनेंसिंग और भविष्य की योजना

इस लोन की अवधि 21.5 साल है। लंबे समय के डेट (Long-term Debt) का इस्तेमाल करके, कंपनी का लक्ष्य सोलर और हाइब्रिड प्लांट्स से होने वाली कमाई के हिसाब से रीपेमेंट शेड्यूल को मैनेज करना है। हालांकि, लोन की ब्याज दर की डिटेल्स अभी गुप्त रखी गई हैं। यह डील भविष्य में उधारदाताओं को लोन के कुछ हिस्से को अन्य वित्तीय संस्थानों को बेचने की सुविधा भी देती है। इन प्रोजेक्ट्स का फेज्ड कमिशनिंग मार्च 2027 में शुरू होने की उम्मीद है और मार्च 2028 तक अतिरिक्त क्षमता चालू हो जाएगी।

रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए, एग्जीक्यूशन रिस्क (Execution Risk) और समय पर प्रोजेक्ट पूरा करने की क्षमता पर ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा। बड़े रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स में अक्सर जमीन अधिग्रहण, ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर और इक्विपमेंट की लागत में बदलाव जैसी चुनौतियाँ आती हैं। इन प्रोजेक्ट्स के ऑफ-टेक एग्रीमेंट तो हैं, लेकिन कंपनी की लाभप्रदता (Profit Margins) निर्माण लागत को बजट में रखने और अगले दो दशकों में अपने कर्ज को चुकाने की क्षमता पर निर्भर करेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.