African Nations: भारतीय सोलर पावर का बढ़ा दबदबा, Zimbabwe और Liberia के साथ हुई बड़ी डील

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AuthorAditya Rao|Published at:
African Nations: भारतीय सोलर पावर का बढ़ा दबदबा, Zimbabwe और Liberia के साथ हुई बड़ी डील

Zimbabwe और Liberia अब भारत के साथ मिलकर अपने सोलर पावर कैपेसिटी को नई ऊंचाई पर ले जा रहे हैं। इस साझेदारी के जरिए भारतीय रिन्यूएबल सेक्टर को एक्सपोर्ट का एक नया फ्रंटियर मिला है, जिसमें टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और ड्यूटी-फ्री इन्सेंटिव्स पर जोर दिया गया है।

भारत अब ग्लोबल एनर्जी ट्रांजिशन में एक बड़ी भूमिका निभा रहा है। 'भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो 2026' के दौरान, Zimbabwe और Liberia ने अपनी पावर इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने के लिए भारत से हाथ मिलाया है। इसमें सोलर मैन्युफैक्चरिंग से लेकर AI-आधारित एनर्जी डिस्ट्रीब्यूशन तक शामिल है।

Zimbabwe का लक्ष्य और ISA के साथ समझौते

Zimbabwe ने 2030 तक 49% बिजली नॉन-फॉसिल फ्यूल से पैदा करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इसके लिए इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) के साथ 3 बड़े समझौते हुए हैं, जिनका उद्देश्य सोलर इनोवेशन और कृषि क्षेत्र में रिन्यूएबल एनर्जी को इंटीग्रेट करना है।

Liberia का प्राइवेट इन्वेस्टमेंट मॉडल

दूसरी ओर, Liberia प्राइवेट इन्वेस्टमेंट पर दांव लगा रहा है। वहां सरकार सोलर इक्विपमेंट पर ड्यूटी-फ्री एक्सेस दे रही है, ताकि प्राइवेट प्लेयर्स 'Liberia Electricity Corporation' को बिजली बेच सकें। इस बिजनेस मॉडल को वहां की माइनिंग कंपनियों के साथ लंबे समय के सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट्स का सपोर्ट भी मिल रहा है।

भारतीय कंपनियों के लिए मौका और चुनौतियां

भारत ने इस पहल के लिए $25 मिलियन की शुरुआती फंडिंग दी है, जो कुल $200 मिलियन की अफ्रीकन सोलर फैसिलिटी का हिस्सा है। भारतीय कंपनियों के लिए यह तकनीकी विशेषज्ञता और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट के एक्सपोर्ट का सुनहरा मौका है। हालांकि, जमीन अधिग्रहण, ग्रिड कनेक्टिविटी में देरी और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी अस्थिरता जैसे रिस्क भी मौजूद हैं, जिन पर निवेशकों को पैनी नजर रखनी होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.