BloombergNEF की 2025 के टॉप 15 ग्लोबल टर्बाइन मैन्युफैक्चरर्स की लिस्ट में Adani Wind का नाम आना, अंतरराष्ट्रीय क्लीन एनर्जी प्रोडक्शन में एक बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है। कंपनी की यह तरक्की भारत के तेजी से बढ़ते विंड एनर्जी मार्केट से जुड़ी है, जो अब चीन के बाद दुनिया का सबसे बड़ा मार्केट बन गया है। 2025 में, भारत ने 169 GW की रिकॉर्ड विंड कैपेसिटी जोड़ी, जो पिछले साल के मुकाबले 38% ज्यादा है। Adani Wind, जो Adani New Industries Ltd (ANIL) का हिस्सा है, ने 3.3 MW से 5.2 MW तक के टर्बाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके इसमें करीब 1.2 GW का योगदान दिया। गुजरात के मुंद्रा में 91.2 मीटर लंबी टर्बाइन ब्लेड्स के प्रोडक्शन जैसी विनिर्माण (manufacturing) क्षमताओं को बढ़ाना, भारत को ग्लोबल विंड इक्विपमेंट हब बनाने के लक्ष्य में मदद कर रहा है।
हालांकि, Adani Wind की यह पोजीशन कड़े ग्लोबल मुकाबले के बीच आई है। 2025 में टॉप 10 ग्लोबल सप्लायर स्पॉट्स में आठ पर चीनी कंपनियों का दबदबा रहा। Goldwind 29.3 GW की क्षमता के साथ सबसे आगे थी, जिसके बाद 20.9 GW के साथ Envision का नंबर आया। यूरोपीय कंपनियां जैसे Vestas और Siemens Gamesa भी अपनी मार्केट शेयर को एडजस्ट कर रही हैं। Vestas 2026 की शुरुआत में लगभग 27-28 के P/E रेशियो पर थी, जबकि Siemens Gamesa को भारी वित्तीय दिक्कतों का सामना करना पड़ा। GE Vernova जैसी बड़ी कंपनियों का मार्केट कैप लगभग $216-230 बिलियन के आसपास रहा।
भारत की डोमेस्टिक विंड मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी लगभग 20 GW तक पहुंच गई है, जिसमें लोकल कंटेंट 70-80% तक है। ANIL की मुंद्रा फैसिलिटी अपनी 2.25 GW कैपेसिटी को 10 GW तक बढ़ाने की योजना बना रही है। यह विस्तार इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ग्लोबल सप्लाई चेन अभी भी कमजोर हैं। स्टील और दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (rare earth elements) जैसे जरूरी कच्चे माल का प्रोडक्शन चीन जैसे क्षेत्रों में केंद्रित है, जिससे भू-राजनीतिक तनाव, टैरिफ और कीमतों में उतार-चढ़ाव का खतरा बना हुआ है।
Adani Green Energy Ltd (AGEL) के स्टॉक ने मार्च 2026 की शुरुआत में करीब ₹861.35 पर कारोबार किया। पिछले एक साल में यह शेयर ₹765.00 से ₹1,179.00 के बीच रहा। मार्च 2026 तक AGEL का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹1.42 लाख करोड़ (लगभग $15.58 बिलियन) था। कंपनी तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन इसका मार्केट वैल्यूएशन लगातार हाई ग्रोथ की उम्मीदों को दर्शाता है। मार्च 2026 के मध्य तक इसका प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेशियो लगभग 86.2 था, जो कुछ स्रोतों के अनुसार 2026 की शुरुआत में 82.71 से 207.5 तक रहा। यह एक प्रीमियम वैल्यूएशन को दिखाता है।
चीन के बाहर के विंड टर्बाइन निर्माताओं को पिछले साल ओवरकैपेसिटी, कम कीमतों और कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण कुल $1.2 बिलियन का भारी नुकसान हुआ। Adani का इंटीग्रेटेड मॉडल सप्लाई चेन कंट्रोल करने का लक्ष्य रखता है, लेकिन महत्वपूर्ण कच्चे माल और कंपोनेंट्स पर निर्भरता इसे ग्लोबल प्राइस फ्लक्चुएशन और संभावित सप्लाई डिसरप्शन के प्रति संवेदनशील बनाती है। AGEL का बहुत हाई P/E रेशियो, जो अक्सर 80x से ऊपर और कभी-कभी 200x से भी अधिक होता है, यह बताता है कि कंपनी को लगातार ऐसी हाई ग्रोथ की उम्मीद है जिसे हासिल करना मुश्किल हो सकता है। एनालिस्ट्स बताते हैं कि AGEL का P/E इंडस्ट्री एवरेज से काफी ज्यादा है। कंपनी के निर्माणधीन बड़े पोर्टफोलियो में इंप्लीमेंटेशन रिस्क भी है, जिसके लिए काफी इक्विटी कैपिटल की जरूरत होगी।
हालांकि, एनालिस्ट्स Adani Green Energy के लिए मजबूत ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं। इनकी कमाई (earnings) और रेवेन्यू में सालाना क्रमशः लगभग 47.7% और 19.4% की वृद्धि का अनुमान है। कंपनी के पास मजबूत मार्केट पोजीशन और ठोस बिजनेस प्रोफाइल है, जिसे लॉन्ग-टर्म पावर परचेज एग्रीमेंट्स (PPAs) का सपोर्ट मिलता है, जो प्रेडिक्टेबल कैश फ्लो सुनिश्चित करते हैं। रेटिंग एजेंसियों ने भी स्टेबल आउटलुक दिया है, जिसमें 'Crisil AA/Stable' और JCR से BBB+ फॉरेन करेंसी रेटिंग शामिल है। यह AGEL की मार्केट लीडरशिप और ऑपरेशनल क्षमताओं को दर्शाता है। Adani का लक्ष्य 2030 तक 50 GW रिन्यूएबल कैपेसिटी तक पहुंचना है, जो भारत के डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों के अनुरूप है।