ग्लोबल इन्वेस्टमेंट फर्म Actis ने भारत में अपना चौथा रिन्यूएबल एनर्जी प्लेटफॉर्म 'Leo Energies' लॉन्च कर दिया है। इसका लक्ष्य सोलर, विंड और बैटरी स्टोरेज में **3 GW** से ज्यादा की क्षमता बनाना है।
भारत के क्लीन एनर्जी सेक्टर में नई एंट्री
भारत सरकार के साल 2030 तक 500 GW नॉन-फॉसिल फ्यूल क्षमता हासिल करने के विजन के बीच Actis ने एक नया कदम उठाया है। Leo Energies ने 650 MWp के अधिग्रहण के साथ अपने सफर की शुरुआत की है। इसमें 160 MWp की चालू जनरेशन कैपेसिटी और 50 MWh के बैटरी स्टोरेज एसेट्स शामिल हैं, जिन्हें TrueRE Oriana Power से अधिग्रहित किया गया है। यह पोर्टफोलियो राजस्थान, तमिलनाडु, गुजरात, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों में फैला हुआ है।
Actis का 'बाय-एंड-बिल्ड' मॉडल
Actis पारंपरिक यूटिलिटी कंपनियों की तरह एसेट्स को लंबे समय तक होल्ड नहीं करती। फर्म की स्ट्रैटेजी है—मौजूदा एसेट्स को खरीदना, उसमें वैल्यू ऐड करना और फिर अंत में उसे किसी बड़ी ग्लोबल या स्ट्रैटेजिक कंपनी को बेच देना। अतीत में कंपनी इसी मॉडल के तहत Ostro Energy को ReNew Power को और Sprng Energy को Shell को बेच चुकी है। इनके अलावा, कंपनी 2022 में BluPine Energy को भी लॉन्च कर चुकी है, जो पहले से ही 3 GW से ज्यादा की क्षमता पर काम कर रहा है।
चुनौतियां और भविष्य की राह
भारत में Actis ने अब तक लगभग $1.5 बिलियन का निवेश किया है। हालांकि, इतने बड़े विस्तार के बावजूद सेक्टर में जमीन अधिग्रहण, रेगुलेटरी क्लियरेंस और ग्रिड कनेक्टिविटी जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। साथ ही, कॉम्पिटिटिव ऑक्शन में टैरिफ का दबाव प्रॉफिटेबिलिटी को प्रभावित कर सकता है। निवेशकों की नजरें इस पर टिकी होंगी कि Leo Energies अपने प्रोजेक्ट्स को कितनी तेजी से जमीन पर उतारती है और अपने एग्जीक्यूशन कॉस्ट को कैसे मैनेज करती है।
