Actis का बड़ा दांव: Sprng Energy पर फिर नजर
प्राइवेट इक्विटी फर्म Actis LLP एक बार फिर चर्चा में है। कंपनी Shell के रिन्यूएबल एनर्जी प्लेटफॉर्म Sprng Energy को वापस खरीदने की तैयारी में है। आपको बता दें कि Actis ने ही इस प्लेटफॉर्म को विकसित किया था और 2022 में इसे Shell को $1.55 बिलियन डॉलर में बेचा था। अब Actis, KKR, NIIF और आदित्य बिड़ला ग्रुप जैसे बड़े खिलाड़ियों के साथ इस रेस में सबसे आगे है। फाइनल बिड्स मार्च के अंत तक आने की उम्मीद है।
डील वैल्यू में बढ़ोतरी, पर सवाल भी
इस संभावित डील का वैल्यूएशन $1.8 से 2 बिलियन डॉलर के बीच आंका जा रहा है, जो Shell की पिछली खरीद कीमत से काफी ज्यादा है। Actis इस प्लेटफॉर्म के साथ अपने पुराने जुड़ाव का फायदा उठाना चाहती है। इससे पहले Actis ने 2018 में अपने Ostro Energy प्लेटफॉर्म (1 GW) को ReNew Power को करीब $1.54 बिलियन डॉलर में बेचा था। Actis का वर्तमान इन्वेस्टमेंट व्हीकल, Actis Long Life Infrastructure Fund II, $1.7 बिलियन डॉलर के साथ बंद हुआ था। Shell ने भी पुष्टि की है कि वे Sprng Energy के लिए रणनीतिक विकल्पों की समीक्षा कर रहे हैं और Barclays इस बिक्री प्रक्रिया को संभालेगा।
Shell की रणनीति और इंडस्ट्री की चिंताएं
हालांकि Actis की वापसी और ऊंचे वैल्यूएशन की चर्चा है, लेकिन इंडस्ट्री की राय में थोड़ी सतर्कता है। इसका मुख्य कारण Shell के स्वामित्व में Sprng Energy का धीमा ग्रीनफील्ड डेवलपमेंट बताया जा रहा है। अनुमान है कि 2022 से 2025 के बीच केवल 200 MW नई क्षमता ही जुड़ पाई है। यह रफ़्तार भारत के बड़े रिन्यूएबल प्लेयर्स जैसे आदित्य बिड़ला रिन्यूएबल्स (ABREN) की तुलना में काफी कम है, जो 10 GW से अधिक क्षमता का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं।
Shell की यह बिक्री उसकी बड़ी रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह कैपिटल-इंटेंसिव रिन्यूएबल पावर जनरेशन से पीछे हट रहा है। कंपनी बेहतर रिटर्न की तलाश में है। Shell के Q4 2025 के एडजस्टेड अर्निंग्स $3.3 बिलियन डॉलर रहे, जबकि पूरे साल के अर्निंग्स $18.5 बिलियन डॉलर थे। हालांकि, इसके रिन्यूएबल्स एंड एनर्जी सॉल्यूशंस सेगमेंट ने 2025 में $489 मिलियन डॉलर का घाटा दर्ज किया। Shell ने नए ऑफशोर विंड फार्म से भी पीछे हटने और अमेरिकी विंड फार्म्स पर लगभग $1 बिलियन डॉलर का राइट-डाउन करने का फैसला किया है। Shell का स्टॉक (SHEL) $75.29 के आसपास कारोबार कर रहा है, जिसका P/E रेश्यो 12x से 15.5x के बीच है।
प्रतिस्पर्धी माहौल और रेगुलेटरी चुनौतियाँ
Sprng Energy के लिए बोली लगाने वालों में KKR जैसे दिग्गज इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टर शामिल हैं, जो भारत में अपने निवेश बढ़ा रहे हैं। भारत का संप्रभु धन कोष (sovereign wealth fund) NIIF भी घरेलू इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। दूसरी ओर, आदित्य बिड़ला ग्रुप अपनी रिन्यूएबल एनर्जी आर्म ABREN को सक्रिय रूप से बढ़ा रहा है, जिसकी क्षमता फिलहाल लगभग 4.3 GW है और लक्ष्य 10 GW से अधिक है।
भारतीय रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर खुद भी रेगुलेटरी बदलावों का सामना कर रहा है। सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (CERC) द्वारा डेविएशन सेटलमेंट नियमों को कड़ा करने से प्रोजेक्ट रेवेन्यू पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, राज्य वितरण कंपनियों (DISCOMs) की वित्तीय सेहत पावर परचेस एग्रीमेंट्स (PPAs) को सुरक्षित करने में एक स्थायी चुनौती बनी हुई है।
जोखिम और आगे का रास्ता
Sprng Energy के लिए $1.8-$2 बिलियन डॉलर का संभावित वैल्यूएशन भारत में क्वालिटी रिन्यूएबल एसेट्स के प्रति मजबूत इन्वेस्टर एपेटाइट को दर्शाता है। हालांकि, Shell के कार्यकाल के दौरान Sprng Energy की धीमी ग्रीनफील्ड ग्रोथ बिडर्स के लिए एक बड़ा जोखिम कारक है। यह, Shell के अपने कमजोर रिन्यूएबल सेगमेंट के साथ मिलकर, प्लेटफॉर्म की वास्तविक डेवलपमेंट ट्रैजेक्ट्री पर सवाल खड़े करता है। इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि अगर Actis या कोई अन्य बिडर Sprng Energy को खरीदता है, तो यह एनर्जी दिग्गजों के कैपिटल-इंटेंसिव रिन्यूएबल जनरेशन से बाहर निकलने का एक बड़ा संकेत होगा, ताकि वे अपने कोर ऑयल एंड गैस ऑपरेशंस या एनर्जी ट्रेडिंग वेंचर्स पर ध्यान केंद्रित कर सकें। भारतीय रिन्यूएबल मार्केट तेजी से बढ़ रहा है और इसमें महत्वपूर्ण निवेश आकर्षित कर रहा है, लेकिन इसमें संभावित भ्रष्टाचार, जटिल लैंड एक्विजिशन प्रोसेसेस और इंपोर्टेड क्रिटिकल मिनरल्स पर निर्भरता जैसे जोखिम भी शामिल हैं। इस डील का सफल निष्कर्ष इस बात पर निर्भर करेगा कि बिडर्स Sprng Energy की डेवलपमेंट पोटेंशियल को उसके हालिया प्रदर्शन और Shell के स्ट्रेटेजिक एग्जिट रैशनल के मुकाबले कैसे आंकते हैं।