यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (YEIDA) ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास एक बड़ा इंडस्ट्रियल नोड और **20 एकड़** की इंटरनेशनल ट्रेड सिटी बनाने की मंजूरी दे दी है। इन प्रोजेक्ट्स का मकसद एयरपोर्ट की लॉजिस्टिक्स क्षमता का फायदा उठाकर लोकल मैन्युफैक्चरिंग और होलसेल कॉमर्स को बढ़ावा देना है।
एयरपोर्ट के पास होगा इंडस्ट्रियल हब का विस्तार
YEIDA ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास एक नए इंडस्ट्रियल हब और इंटरनेशनल ट्रेड सिटी को डेवलप करने की आधिकारिक योजना को मंजूरी दे दी है। यह रणनीतिक कदम एयरपोर्ट के विस्तार का लाभ उठाने के लिए उठाया गया है, जिसने 15 जून, 2026 को अपनी फुल फ्लाइट ऑपरेशन्स शुरू कर दी थी। अथॉरिटी को उम्मीद है कि ये प्रोजेक्ट्स यमुना एक्सप्रेसवे कॉरिडोर को मैन्युफैक्चरिंग, वेयरहाउसिंग और होलसेल ट्रेड के एक प्रमुख केंद्र में बदल देंगे।
प्रस्तावित इंडस्ट्रियल हब नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के दक्षिणी हिस्से में बनेगा। इसका मुख्य लक्ष्य उन सेक्टर्स के लिए एक विशेष जगह उपलब्ध कराना है जिन्हें एयर कनेक्टिविटी से फायदा होता है, जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, मेडिकल डिवाइसेस और डेटा सेंटर्स। इन फैसिलिटीज़ को एयरपोर्ट के करीब स्थापित करके, अथॉरिटी एक ऐसी लॉजिस्टिक्स-फ्रेंडली एनवायरनमेंट बनाना चाहती है जो एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड यूनिट्स के लिए ट्रांसपोर्ट टाइम और कॉस्ट को कम करे। निवेशकों को यह ध्यान देना चाहिए कि इस हब की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि अथॉरिटी इन इंडस्ट्रियल प्लॉट्स को समय पर जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे पावर, वाटर और कनेक्टिविटी प्रदान कर पाती है या नहीं।
20 एकड़ की ट्रेड सिटी और आर्थिक असर
मैन्युफैक्चरिंग के अलावा, YEIDA सेक्टर 7, 8 और 8A में 20 एकड़ की इंटरनेशनल ट्रेड सिटी की योजना बना रहा है। यह प्रोजेक्ट, जिसके लिए अर्न्स्ट एंड यंग (Ernst & Young) ने एक फिजिबिलिटी स्टडी की थी, चीन के यिवू इंटरनेशनल ट्रेड सिटी (Yiwu International Trade City) के मॉडल पर आधारित है। इसे प्रोडक्ट्स के लिए एक परमानेंट एग्जीबिशन और होलसेल हब के तौर पर डिजाइन किया गया है, जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार की 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' (ODOP) पहल के तहत उत्पादित वस्तुएं भी शामिल होंगी।
इस इंफ्रास्ट्रक्चर में डोमेस्टिक और ग्लोबल ट्रेडर्स को सपोर्ट करने के लिए कन्वेंशन सेंटर, ऑफिस स्पेस और हॉस्पिटैलिटी फैसिलिटीज़ शामिल होंगी। हालांकि यह प्रोजेक्ट इस क्षेत्र में कमर्शियल और रेजिडेंशियल रियल एस्टेट की डिमांड को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखता है, लिस्टेड इंफ्रास्ट्रक्चर, रियल एस्टेट और लॉजिस्टिक्स कंपनियों के लिए लॉन्ग-टर्म फायदा इस बात से तय होगा कि ये सेक्टर्स कितनी जल्दी डेवलप होते हैं और कंपनियों द्वारा ऑक्यूपाई किए जाते हैं।
संभावित जोखिम और निगरानी
इस क्षेत्र पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए, बड़े पैमाने पर लैंड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स से जुड़े जोखिमों पर विचार करना महत्वपूर्ण है। इनमें लैंड एक्विजिशन में देरी, रेगुलेटरी बाधाएं और प्रोजेक्ट्स का पूरी तरह से उपयोग सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त प्राइवेट इन्वेस्टमेंट आकर्षित करने की आवश्यकता शामिल है। इस क्षेत्र का आर्थिक विकास काफी हद तक नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के एक प्रमुख कार्गो और पैसेंजर गेटवे के तौर पर प्रदर्शन से जुड़ा हुआ है। भविष्य में ट्रैक करने योग्य अपडेट्स में डेवलपमेंट के लिए ऑफिशियल टेंडर की तारीखें, प्रोजेक्ट कमीशनिंग टाइमलाइन और नई ट्रेड सिटी के लिए एंकर टेनेंट्स को सुरक्षित करने की अथॉरिटी की क्षमता शामिल है।
