यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) ने जेवर के नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे दी है। इनमें 500 एकड़ का मेडिकल हब और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के लिए 300 एकड़ की 'ताइवान सिटी' शामिल है। 92वीं बोर्ड मीटिंग में लिए गए ये फैसले निवेश आकर्षित करने और इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम बनाने पर केंद्रित हैं।
जेवर के आसपास विकास की नई लहर
यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (YEIDA) ने 17 अगस्त, 2026 को हुई अपनी 92वीं बोर्ड मीटिंग में कई बड़े विकास प्रोजेक्ट्स पर मुहर लगाई है। इन पहलों का मकसद जेवर में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के इर्द-गिर्द एक मजबूत इंडस्ट्रियल और इंस्टीटूशनल इकोसिस्टम तैयार करना है।
बड़े प्रोजेक्ट्स को मिली मंजूरी
बोर्ड ने सेक्टर 13 और 14 में 500 एकड़ का मेडिकल हब बनाने को मंजूरी दी है, जिससे इस क्षेत्र की हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही, सेक्टर 14 में 480 एकड़ की यूनिवर्सिटी टाउनशिप को भी हरी झंडी मिल गई है, जिसका लक्ष्य एजुकेशनल सुविधाओं को बढ़ाना है। अथॉरिटी ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग को आकर्षित करने पर भी जोर दे रही है, जिसके तहत सेक्टर 6 में 300 एकड़ का एरिया 'ताइवान सिटी' के रूप में विकसित किया जाएगा। यह विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्नोलॉजी कंपनियों को सपोर्ट करेगा। इसके अलावा, इसी सेक्टर में 100 से 125 एकड़ का फार्मास्युटिकल फॉर्मूलेशन मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर भी स्थापित किया जाएगा, जो डोमेस्टिक और इंटरनेशनल फार्मा कंपनियों को आमंत्रित करेगा।
कनेक्टिविटी और अन्य सुविधाएं
इन इंडस्ट्रियल और सोशल हब के अलावा, अथॉरिटी ने सेक्टर 23D में 50 एकड़ का इंटरनेशनल स्टेडियम, सेक्टर 23C में एक इंटर-स्टेट बस टर्मिनल और सेक्टर 34 में 36 एकड़ की आधुनिक एग्रीकल्चरल मार्केट (मंडी) बनाने की भी योजना को मंजूरी दी है। इन प्रोजेक्ट्स का उद्देश्य कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना और स्थानीय उपज के व्यापार को सुविधाजनक बनाना है।
किसानों को मिलेगा ज्यादा मुआवजा
इन विकासों के हिस्से के रूप में, अथॉरिटी ने गौतम बुद्ध नगर और बुलंदशहर में किसानों से आपसी सहमति से जमीन खरीदने की दर को बढ़ाकर ₹4,558 प्रति वर्ग मीटर कर दिया है, जो पहले ₹4,300 प्रति वर्ग मीटर था। यह बढ़ोतरी कॉरिडोर में जमीन के बढ़ते मूल्य और प्रोजेक्ट्स को तेजी से शुरू करने के लिए जमीन अधिग्रहण को सुव्यवस्थित करने के अथॉरिटी के प्रयासों को दर्शाता है।
निवेश के मौके और जोखिम
जहां ये डेवलपमेंट तेजी से ग्रोथ का संकेत देते हैं, वहीं निवेशकों को बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से जुड़े सामान्य जोखिमों पर भी गौर करना चाहिए। इन योजनाओं की सफलता अथॉरिटी की समय पर निर्माण पूरा करने की क्षमता पर निर्भर करेगी। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि इन हब में कॉर्पोरेट किरायेदारों को आकर्षित करने की क्षमता महत्वपूर्ण होगी। यमुना एक्सप्रेसवे और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र का रियल एस्टेट मार्केट ऐतिहासिक रूप से डेवलपमेंट की घोषणाओं के आधार पर कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखता रहा है। इसलिए, हालांकि ये मंजूरी सरकारी इरादे को दर्शाती हैं, क्षेत्रीय आर्थिक विकास पर इसका दीर्घकालिक प्रभाव आने वाले वर्षों में वास्तविक ऑक्यूपेंसी रेट और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट फ्लो पर निर्भर करेगा।
अगले कदम में इन प्रोजेक्ट्स के लिए विस्तृत डेवलपमेंट टेंडर जारी करना, इंडस्ट्रीज और डेवलपर्स के लिए लैंड अलॉटमेंट प्रक्रिया और उसके बाद कंस्ट्रक्शन फेज शामिल होंगे। स्टेकहोल्डर्स फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर में विशिष्ट कंपनियों के निवेश पर अपडेट की प्रतीक्षा करेंगे, क्योंकि यह वास्तविक मांग का एक स्पष्ट संकेतक होगा।
