पश्चिम बंगाल सरकार इंडस्ट्रियल सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य अर्बन लैंड सीलिंग एंड रेगुलेशन एक्ट (ULCRA) को रद्द करने की तैयारी में है। इसके साथ ही, 15 अगस्त 2026 को आने वाली नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी के तहत सरकार रोजगार बढ़ाने वाले इंसेंटिव्स के लिए ₹5,000 करोड़ का बजट भी आवंटित कर रही है।
जमीन अधिग्रहण होगा आसान, ULCRA होगा रद्द
पश्चिम बंगाल सरकार अपने राज्य में इंडस्ट्रियल ग्रोथ को रफ्तार देने के लिए बड़े नियामक बदलाव कर रही है। इसका सबसे अहम हिस्सा अर्बन लैंड सीलिंग एंड रेगुलेशन एक्ट (ULCRA) को खत्म करना है। इस एक्ट के चलते जमीन अधिग्रहण में काफी मुश्किलें आती थीं और प्रोजेक्ट्स में देरी होती थी। इसे रद्द करने से इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन मिलना आसान हो जाएगा, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग में निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
रोजगार पर फोकस, ₹5,000 करोड़ का खास फंड
15 अगस्त 2026 को राज्य सरकार एक नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी लाने वाली है। इस बार सरकार का फोकस सिर्फ बड़े इन्वेस्टमेंट टारगेट पर नहीं, बल्कि सीधे तौर पर रोजगार पैदा करने पर होगा। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए 2026-27 के बजट में ₹5,000 करोड़ का खास फंड रखा गया है। इस पैसे का इस्तेमाल इंडस्ट्रियल इंसेंटिव्स और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए किया जाएगा, ताकि प्राइवेट कैपिटल को आकर्षित किया जा सके।
सिंगल-विंडो क्लीयरेंस और लैंड बैंक की तैयारी
इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट की मुश्किलों को दूर करने के लिए सरकार कंपनियों को जमीन अधिग्रहण में सीधी मदद करेगी। साथ ही, एक 'सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम' और GIS-बेस्ड 'लैंड बैंक' बनाने की भी योजना है। इससे इन्वेस्टर्स को सही जमीन की जानकारी आसानी से मिल पाएगी और सरकारी अड़चनें कम होंगी, जिससे प्रोजेक्ट्स तेजी से शुरू हो सकेंगे।
चुनौतियां और जोखिम
पॉलिसी में ये बदलाव सकारात्मक संकेत दे रहे हैं, लेकिन इन्हें लागू करना सबसे अहम होगा। पश्चिम बंगाल में जमीन से जुड़ी कुछ खास दिक्कतें हैं। राज्य में जमीन के टुकड़े-टुकड़े में मालिकी (fragmented ownership) और 'बरगा' (बटाईदारी) जैसी पुरानी समस्याएं जमीन अधिग्रहण को जटिल बना सकती हैं। इसके अलावा, सिंगूर जैसे आंदोलनों की वजह से जमीन अधिग्रहण को लेकर संवेदनशील माहौल भी है। ऐसे में, सरकार को तेजी और सामाजिक सहमति के बीच संतुलन बनाना होगा, ताकि प्रोजेक्ट में देरी या कोई विवाद न हो।
आगे क्या?
इन्वेस्टर्स की नजरें 15 अगस्त को आने वाली नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी के खास डिटेल्स पर होंगी। खास तौर पर, जमीन अधिग्रहण के नियम, ₹5,000 करोड़ के इंसेंटिव्स कैसे बांटे जाएंगे, और क्या सरकार आसानी से प्रोजेक्ट के लिए जमीन उपलब्ध करा पाएगी, यह देखना अहम होगा। इस पॉलिसी की सफलता सिर्फ कानूनों पर नहीं, बल्कि जमीन की उपलब्धता और सामाजिक स्थिरता बनाए रखने की राज्य की क्षमता पर भी निर्भर करेगी।
