पश्चिम बंगाल सरकार ने 1976 के Urban Land (Ceiling and Regulation) Act को निरस्त करने की योजना का ऐलान किया है। इस कदम से जमीन के बड़े टुकड़े आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे, जिससे रियल एस्टेट और इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
पश्चिम बंगाल सरकार अब अपने नियामक ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार 1976 के अर्बन लैंड सीलिंग एक्ट को खत्म करने जा रही है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल देश का इकलौता बड़ा राज्य है जहां अब भी यह पुराना कानून लागू है। इस नीतिगत बदलाव का मुख्य मकसद राज्य के आर्थिक परिदृश्य को आधुनिक बनाना और इंफ्रास्ट्रक्चर एवं रियल एस्टेट सेक्टर में प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी को बढ़ावा देना है।
डेवलपर्स के लिए पुरानी अड़चन खत्म
बीते कई दशकों से 1976 का यह कानून शहरी विकास में एक बड़ी रुकावट बना हुआ था। इस कानून के तहत शहरी इलाकों में खाली जमीन रखने की सीमा बहुत कम, यानी महज 500 वर्ग मीटर तक सीमित थी। इस पाबंदी के कारण रियल एस्टेट डेवलपर्स को अपने प्रोजेक्ट्स को छोटे टुकड़ों में बांटना पड़ता था या फिर जमीन जुटाने के लिए कई अलग-अलग एंटिटीज के जरिए काम करना पड़ता था। संस्थागत निवेशक और बड़े रियल एस्टेट फंड हमेशा बड़े और एक साथ जुड़े हुए जमीन के टुकड़ों की तलाश में रहते हैं, जिसे यह कानून प्रभावी रूप से रोकता था।
इस एक्ट के हटने से कोलकाता और राज्य के अन्य हिस्सों को राष्ट्रीय विकास के रुझानों के अनुरूप लाने की कोशिश की जा रही है। CREDAI जैसे उद्योग निकायों ने भी इस फैसले का स्वागत किया है और इसे प्रॉपर्टी मार्केट के लिए एक जरूरी कदम बताया है।
निवेश से पहले किन बातों का रखें ध्यान?
भले ही यह खबर बिजनेस सेंटिमेंट के लिए सकारात्मक है, लेकिन निवेशकों को इसे लेकर सावधानी भी बरतनी चाहिए। 1976 का एक्ट सिर्फ एक कानूनी बाधा थी, लेकिन अभी भी 'वेस्ट बंगाल लैंड रिफॉर्म्स एक्ट' जैसे कई अन्य कानून प्रभावी हैं जो विशेष रूप से कृषि भूमि के उपयोग और अधिग्रहण की प्रक्रिया को नियंत्रित करते हैं।
इसके अलावा, राज्य में जमीन के टाइटल रिकॉर्ड्स और पुरानी कानूनी मुकदमेबाजी (Legacy Litigation) एक जटिल मुद्दा रही है। कानून हटने के बाद भी जमीन के क्लियर टाइटल और कन्वर्जन की प्रक्रिया में तेजी सरकार द्वारा रिकॉर्ड्स के डिजिटलीकरण और विवादों को सुलझाने की गति पर निर्भर करेगी। निवेशकों के लिए असली कामयाबी तब दिखेगी जब जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में आने वाली इन व्यावहारिक अड़चनों को दूर कर दिया जाएगा।
