Welspun One अपने पहले फंड के तहत चार लॉजिस्टिक्स पार्कों को बेचकर ₹800 करोड़ जुटाने की तैयारी में है। यह कदम कंपनी के पहले इन्वेस्टमेंट व्हीकल के मैच्योर होने और दूसरे लॉजिस्टिक्स फंड को बड़ा करने की रणनीति का हिस्सा है।
Detailed Coverage
Welspun One की एग्जिट स्ट्रैटेजी
Welspun World ग्रुप का हिस्सा Welspun One, अपने पहले लॉजिस्टिक्स पार्क्स फंड को बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर चुका है। कंपनी ने अपने बचे हुए चार लॉजिस्टिक्स एसेट्स की बिक्री के लिए CBRE को हायर किया है। ये प्रॉपर्टीज 4.5 मिलियन स्क्वायर फीट में फैली हैं और बेंगलुरु, लखनऊ, नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) और चेन्नई में स्थित हैं। इस पोर्टफोलियो के वेयरहाउस Amazon, Flipkart, DHL और Delhivery जैसी बड़ी कंपनियों को लीज पर दिए गए हैं, जिनसे कंपनी को स्टेबल रेंटल इनकम मिल रही है।
₹800 करोड़ तक का वैल्यूएशन
कंपनी इन एसेट्स के लिए ₹600 करोड़ से ₹800 करोड़ के बीच इक्विटी वैल्यूएशन का लक्ष्य रख रही है। कर्ज (Debt) को मिलाकर देखें तो इस पोर्टफोलियो का एंटरप्राइज वैल्यू ₹1,600 करोड़ से ₹1,700 करोड़ तक रहने की उम्मीद है। यह बिक्री 2020-21 में लॉन्च हुए पहले फंड के लाइफसाइकिल का अंत दर्शाती है। इस फंड ने पहले छह प्रोजेक्ट्स में निवेश किया था और Bhiwandi व Farrukhnagar में अपने एसेट्स को पहले ही बेच चुकी है।
यह एग्जिट निवेशकों के लिए कंपनी की पूरी वैल्यू चेन स्ट्रैटेजी को लागू करने की क्षमता को दर्शाता है – डेवलपमेंट, लीजिंग से लेकर फाइनल सेल तक। ग्रेड A, ग्रीनफील्ड लॉजिस्टिक्स पार्क्स पर फोकस Welspun One की रणनीति का अहम हिस्सा रहा है, जिससे कंपनी को भारत के ई-कॉमर्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के ग्रोथ का फायदा मिल रहा है। इन मैच्योर एसेट्स को बेचकर, कंपनी अपने पुराने निवेशकों को कैपिटल वापस कर पाएगी और मैनेजमेंट रिसोर्सेज को फ्री कर पाएगी।
नए निवेशों को बढ़ाना
पहले फंड को वाइंड-डाउन करते हुए, Welspun One अपने नए इन्वेस्टमेंट व्हीकल्स को भी बड़ा कर रहा है। कंपनी अपने दूसरे फंड के तहत नौ प्रोजेक्ट्स में पहले ही करीब ₹2,000 करोड़ का निवेश कर चुकी है। इसके अलावा, इसने ₹1,000 करोड़ का को-इन्वेस्टमेंट प्रोग्राम भी लॉन्च किया है। फर्म का लक्ष्य कुल मिलाकर लगभग 14 से 15 प्रोजेक्ट्स का एक पाइपलाइन बनाना है। इस बड़े पैमाने पर डेवलपमेंट की ओर शिफ्ट होने का उद्देश्य भारत के टियर-I और टियर-II शहरों में हाई-क्वालिटी, मॉडर्न वेयरहाउसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग को पूरा करना है।
इस एसेट सेल के कंप्लीशन को ट्रैक करना फंड के निवेशकों के लिए फाइनल रिटर्न को समझने में महत्वपूर्ण होगा। इसके अलावा, बाजार पर्यवेक्षक इस बात पर भी नजर रखेंगे कि कंपनी कितनी तेजी से अपने नए प्रोजेक्ट्स में कैपिटल डिप्लॉय कर पाती है और अपने पिछले पोर्टफोलियो में देखे गए हाई ऑक्यूपेंसी लेवल्स को बनाए रख पाती है। लॉजिस्टिक्स रियल एस्टेट सेक्टर ब्याज दरों के उतार-चढ़ाव और इंडस्ट्रियल डिमांड में बदलावों के प्रति संवेदनशील बना हुआ है, जो कंपनी की चल रही विस्तार योजना की सफलता को प्रभावित करने वाले कारक होंगे।
