WeWork India ने वितीय वर्ष 2027 की पहली तिमाही में शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का रेवेन्यू **28%** बढ़कर **₹680 करोड़** हो गया, जबकि EBITDA में **69%** का जबरदस्त इजाफा हुआ है। कंपनी के ऑफिसों में ऑक्यूपेंसी रेट **85%** तक पहुंच गया है, जिसके चलते अब मैनेजमेंट **12 मिलियन वर्ग फुट** तक विस्तार करने की योजना बना रहा है।
WeWork India की पहली तिमाही में तूफानी कमाई!
WeWork India ने वितीय वर्ष 2027 की शुरुआत धमाकेदार की है। कंपनी ने लचीले ऑफिस स्पेस (flexible workspace) की बढ़ती मांग का फायदा उठाते हुए पहली तिमाही में 28% की जबरदस्त रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है। कंपनी का रेवेन्यू बढ़कर ₹680 करोड़ हो गया है।
मुनाफे की बात करें तो, IGAAP EBITDA में पिछले साल की तुलना में 69% का उछाल आया है और यह ₹140 करोड़ तक पहुंच गया है। इससे कंपनी का EBITDA मार्जिन 20% पर आ गया है। यह सब कंपनी के पोर्टफोलियो ऑक्यूपेंसी रेट के 85% तक पहुंचने के कारण संभव हुआ है, जो पिछले साल से 840 बेसिस पॉइंट ज्यादा है।
विस्तार की बड़ी योजनाएं
WeWork India अपनी सेवाओं का विस्तार करने पर पूरा ध्यान दे रही है। कंपनी फिलहाल 9.1 मिलियन वर्ग फुट में फैली हुई है और करीब 133,600 डेस्क उपलब्ध कराती है। अब कंपनी अपनी कुल ऑपरेशनल एरिया को बढ़ाकर 12 मिलियन वर्ग फुट तक ले जाने की तैयारी में है, जिससे करीब 179,000 डेस्क की क्षमता तैयार हो जाएगी। यह विस्तार प्रीमियम वर्कस्पेस सेगमेंट में लगातार देखी जा रही मांग को भुनाने के लिए है।
रेवेन्यू अकाउंटिंग में बदलाव
वित्तीय वर्ष 2027 से, WeWork India वैल्यू एडेड सर्विसेज (VAS) से होने वाली कमाई का हिसाब-किताब बदलने जा रही है। अब इस रेवेन्यू को ग्राहकों के अनुबंध की अवधि के अनुसार बुक किया जाएगा। पहले, कंपनी इस कस्टमाइजेशन रेवेन्यू को तुरंत दर्ज कर लेती थी। इस बदलाव का मकसद तिमाही और सालाना वित्तीय नतीजों में आने वाली अस्थिरता को कम करना है, जिससे निवेशकों को कंपनी की वित्तीय सेहत का अधिक स्थिर चित्र मिल सके।
आगे की राह और वैल्यूएशन
इन नतीजों के बाद, I-Sec के एनालिस्ट्स का कंपनी के वित्तीय भविष्य को लेकर पॉजिटिव रुख बना हुआ है। उनका अनुमान है कि सितंबर 2027 तक कंपनी का एंटरप्राइज वैल्यू ₹12,430 करोड़ तक पहुंच सकता है (EBITDA के 17 गुना के अनुमान पर)। ₹130 करोड़ के अनुमानित नेट कैश को एडजस्ट करने के बाद, इक्विटी वैल्यू ₹12,560 करोड़ यानी ₹937 प्रति शेयर हो सकती है। अब देखना यह होगा कि कंपनी 12 मिलियन वर्ग फुट के लक्ष्य को हासिल करते हुए 85% ऑक्यूपेंसी रेट को बनाए रख पाती है या नहीं, और रेवेन्यू अकाउंटिंग में बदलाव से कमाई कितनी स्थिर होती है।
