WeWork India के एमडी करण विरवानी का कहना है कि AI को अपनाने से फ्लेक्सिबल ऑफिस स्पेस की मांग बढ़ेगी। कंपनी की पहली तिमाही (Q1) की कमाई **28%** बढ़कर **₹683 करोड़** हो गई है, लेकिन निवेशक कंपनी के भारी कर्ज, महंगी वैल्यूएशन और प्रमोटर शेयरों की गिरवी पर पैनी नजर रख रहे हैं।
AI से ऑफिस स्पेस की मांग में तेजी
WeWork India अपनी बिजनेस स्ट्रैटेजी को बदलते हुए फ्लेक्सिबल ऑफिस स्पेस की बढ़ती मांग को भुनाने की तैयारी में है। कंपनी का मानना है कि भारतीय कंपनियां जिस तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अपना रही हैं, उससे इस मांग को और बल मिलेगा। WeWork India के एमडी करण विरवानी ने कहा कि जैसे-जैसे कंपनियां AI को इंटीग्रेट कर रही हैं, लंबी अवधि के और फिक्स्ड ऑफिस लीजिंग मॉडल कम आकर्षक होते जा रहे हैं। अब कंपनियां ऐसे ऑफिस स्पेस चाहती हैं जो प्रोजेक्ट टाइमलाइन और वर्कफोर्स की जरूरतों के हिसाब से जल्दी एडजस्ट हो सकें।
AI अपनाने में भारत सबसे आगे
WeWork India और Redseer Strategy Consultants की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 95% भारतीय कंपनियां अगले 18 से 24 महीनों में AI को अपनाने की रफ्तार तेज करेंगी। 2019 के बाद से AI से जुड़ी हायरिंग में छह गुना बढ़ोतरी देखी गई है। ऐसे में, कंपनियां अब पहले से सालों आगे की हायरिंग का अनुमान लगाने के बजाय, टेक्नोलॉजी के बदलते चक्रों के साथ तालमेल बिठाने के लिए जरूरी स्पीड और लचीलापन देने वाले रियल एस्टेट सॉल्यूशंस को प्राथमिकता दे रही हैं।
पहली तिमाही के नतीजे
कंपनी के ऑपरेशन्स पर फोकस का असर नतीजों में दिख रहा है। जून 2026 को खत्म हुई तिमाही में, WeWork India का रेवेन्यू पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 28% बढ़कर ₹683.83 करोड़ हो गया। हालांकि, कंपनी अभी भी प्रॉफिटेबिलिटी बढ़ाने की प्रक्रिया में है और इस अवधि में ₹4.31 करोड़ का नेट लॉस दर्ज किया है। जून तिमाही के अंत तक, कंपनी के पास 8 शहरों में 79 सेंटर्स में 9.1 मिलियन वर्ग फुट का ऑपरेशनल पोर्टफोलियो था।
निवेशकों के लिए चिंताएं और जोखिम
कंपनी अपने बिजनेस का विस्तार कर रही है, लेकिन निवेशक कंपनी की फाइनेंशियल हेल्थ और गवर्नेंस पर करीबी नजर रखे हुए हैं। कंपनी पर एक बड़ा कर्ज है, जो अगस्त 2026 के मध्य तक 17.16 गुना के डेट-टू-इक्विटी रेशियो पर था। इस भारी उधारी के चलते कैश फ्लो का मैनेजमेंट बहुत अहम हो जाता है।
इसके अलावा, मार्केट एनालिस्ट कंपनी की वैल्यूएशन पर भी गौर कर रहे हैं। इसका प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) मल्टीपल लगभग 109 है, जो मार्केट के औसत से काफी ज्यादा है, यानी शेयर प्रीमियम वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा है। गवर्नेंस के मोर्चे पर, प्रमोटर ग्रुप की 35% हिस्सेदारी गिरवी रखी गई है। निवेशक कंपनी की 10वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM), जो 24 अगस्त 2026 को होनी है, में कर्ज घटाने की योजनाओं और ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर अपडेट का इंतजार करेंगे।
