Vipul Ltd के CEO-MD गिरफ्तार: ₹6 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप!

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AuthorMehul Desai|Published at:
Vipul Ltd के CEO-MD गिरफ्तार: ₹6 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप!
Overview

Vipul Limited के निवेशकों के लिए एक बड़ा झटका लगा है। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD), चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) और चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO), पुनीत बेरीवाला, को **₹6 करोड़** की धोखाधड़ी के आरोपों में गिरफ्तार किया गया है। यह गिरफ्तारी **February 27, 2026** को हुई।

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यह गिरफ्तारी FIR No 544/2024 से जुड़ी है, जिसमें वकीलों ने आरोप लगाया है कि पुनीत बेरीवाला ने उनसे ₹6 करोड़ की ठगी की है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि बेरीवाला ने उन्हें एक रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में बड़ा रिटर्न देने का वादा करके पैसे निवेश करवाए, लेकिन न तो वे वादे पूरे हुए और न ही पैसे वापस मिले। पुलिस को शक है कि इन पैसों को दूसरे प्रोजेक्ट्स में लगाया गया।

हालांकि, Vipul Limited ने यह साफ किया है कि कंपनी के कामकाज सामान्य रूप से चल रहे हैं। कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स इस समय अंतरिम प्रबंधन (interim management) की व्यवस्थाओं पर सक्रिय रूप से विचार कर रहे हैं, ताकि नेतृत्व का यह खालीपन भरा जा सके।

इस घटनाक्रम से कंपनी के कॉरपोरेट गवर्नेंस (corporate governance) और नेतृत्व की स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इससे निवेशकों का भरोसा कम हो सकता है और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स के काम में भी रुकावट आ सकती है।

पूरी कहानी यह है कि वकीलों के एक समूह ने 2024 में Vipul Limited में एक रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के लिए ₹6 करोड़ का निवेश किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि पुनीत बेरीवाला ने भारी रिटर्न का वादा किया था, लेकिन पैसे मिलने के बाद वे संपर्क में नहीं रहे। बाद में चेक बाउंस हुए और पैसे भी वापस नहीं किए गए। इसी शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की गई थी, जो October 1, 2025 को फाइल हुई थी।

यह ध्यान देने वाली बात है कि Vipul Limited को December 2025 में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) से एक मामले में अंतरिम राहत मिली थी।

अब कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती नेतृत्व का खालीपन भरना, कॉर्पोरेट गवर्नेंस को मजबूत करना और निवेशकों का भरोसा फिर से जीतना होगा। इसके अलावा, कंपनी को कानूनी कार्रवाई, ऑपरेशनल रुकावटों और अपनी प्रतिष्ठा को होने वाले नुकसान का भी सामना करना पड़ सकता है।

आगे निवेशकों को कंपनी की ओर से अंतरिम मैनेजमेंट नियुक्त करने की घोषणाओं, पुलिस जांच के नतीजों और NCLT में चल रहे मामलों पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.