यह गिरफ्तारी FIR No 544/2024 से जुड़ी है, जिसमें वकीलों ने आरोप लगाया है कि पुनीत बेरीवाला ने उनसे ₹6 करोड़ की ठगी की है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि बेरीवाला ने उन्हें एक रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में बड़ा रिटर्न देने का वादा करके पैसे निवेश करवाए, लेकिन न तो वे वादे पूरे हुए और न ही पैसे वापस मिले। पुलिस को शक है कि इन पैसों को दूसरे प्रोजेक्ट्स में लगाया गया।
हालांकि, Vipul Limited ने यह साफ किया है कि कंपनी के कामकाज सामान्य रूप से चल रहे हैं। कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स इस समय अंतरिम प्रबंधन (interim management) की व्यवस्थाओं पर सक्रिय रूप से विचार कर रहे हैं, ताकि नेतृत्व का यह खालीपन भरा जा सके।
इस घटनाक्रम से कंपनी के कॉरपोरेट गवर्नेंस (corporate governance) और नेतृत्व की स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इससे निवेशकों का भरोसा कम हो सकता है और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स के काम में भी रुकावट आ सकती है।
पूरी कहानी यह है कि वकीलों के एक समूह ने 2024 में Vipul Limited में एक रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के लिए ₹6 करोड़ का निवेश किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि पुनीत बेरीवाला ने भारी रिटर्न का वादा किया था, लेकिन पैसे मिलने के बाद वे संपर्क में नहीं रहे। बाद में चेक बाउंस हुए और पैसे भी वापस नहीं किए गए। इसी शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की गई थी, जो October 1, 2025 को फाइल हुई थी।
यह ध्यान देने वाली बात है कि Vipul Limited को December 2025 में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) से एक मामले में अंतरिम राहत मिली थी।
अब कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती नेतृत्व का खालीपन भरना, कॉर्पोरेट गवर्नेंस को मजबूत करना और निवेशकों का भरोसा फिर से जीतना होगा। इसके अलावा, कंपनी को कानूनी कार्रवाई, ऑपरेशनल रुकावटों और अपनी प्रतिष्ठा को होने वाले नुकसान का भी सामना करना पड़ सकता है।
आगे निवेशकों को कंपनी की ओर से अंतरिम मैनेजमेंट नियुक्त करने की घोषणाओं, पुलिस जांच के नतीजों और NCLT में चल रहे मामलों पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए।