Enforcement Directorate (ED) ने Vatika Group के प्रमोटर्स अनिल भल्ला और गौतम भल्ला को **260 करोड़ रुपये** के लैंड फ्रॉड केस में गिरफ्तार किया है। मामला 2010 से 2012 के बीच गुरुग्राम प्रोजेक्ट्स के लिए लिए गए फंड की हेराफेरी से जुड़ा है।
क्या है पूरा मामला?
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुग्राम स्थित Vatika Group के प्रमोटर्स अनिल भल्ला और गौतम भल्ला को 28 सितंबर, 2026 को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई PMLA (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) के तहत की गई है, जिसमें होमबायर्स से जुटाए गए फंड को गलत तरीके से इस्तेमाल करने का आरोप है।
फंड डायवर्जन के गंभीर आरोप
जांच में पता चला है कि ग्रुप ने 2010 और 2012 के बीच सात अलग-अलग बायर्स एंटिटी से करीब 260 करोड़ रुपये जुटाए थे। ये पैसा 'Vatika India Next' और 'Vatika India Next-2' (गुरुग्राम के सेक्टर 84, 85 और 88A) के लिए लिया गया था। चौंकाने वाली बात यह है कि 14 साल बीत जाने के बाद भी बायर्स को जमीन नहीं मिली। ED का दावा है कि 22 सहायक कंपनियों (subsidiary companies) का जाल बिछाकर पैसों को ठिकाने लगाया गया, जबकि इन कंपनियों का कोई वास्तविक बिजनेस मॉडल नहीं था। इस पूरी हेराफेरी में 154.4 करोड़ रुपये के 'प्रोसीड्स ऑफ क्राइम' होने का अनुमान है।
गवर्नेंस और ऑपरेशंस पर संकट
बाजार के जानकारों के लिए यह एक बड़ा गवर्नेंस रिस्क है। इससे पहले अगस्त 2026 में ED ने कंपनी की 33 करोड़ रुपये की संपत्ति, जिसमें लक्जरी गाड़ियां और ज्वैलरी शामिल हैं, सीज कर दी थी। प्रमोटर्स की गिरफ्तारी से कंपनी के रोजमर्रा के कामकाज पर बुरा असर पड़ना तय है। इसके अलावा, पहले भी क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने कंपनी की वित्तीय पारदर्शिता और कर्ज चुकाने की क्षमता पर सवाल उठाए हैं।
निवेशकों को अब क्या देखना चाहिए?
फिलहाल दोनों प्रमोटर्स को 3 अक्टूबर, 2026 तक ED की कस्टडी में भेजा गया है। अब नजरें इस बात पर हैं कि कानूनी प्रक्रिया आगे क्या मोड़ लेती है। प्रोजेक्ट्स के अधूरे रहने और कर्ज के दबाव के बीच, कंपनी की लॉन्ग-टर्म वायबिलिटी पर बड़ा संकट मंडरा रहा है। EOW (दिल्ली पुलिस) की शुरुआती FIR और भविष्य की रेगुलेटरी कार्रवाई पर सभी की पैनी नजर बनी रहेगी।
