📉 फाइनेंसियल डीप डाइव: ऑडिटर की गंभीर चेतावनी
Unitech Limited के दिसंबर 2025 को समाप्त हुई तिमाही और नौ महीनों के अन-ऑडिटेड फाइनेंशियल रिजल्ट्स कंपनी की गंभीर वित्तीय स्थिति को दर्शाते हैं। इन नतीजों को स्टेट्यूटरी ऑडिटर GSA & Associates LLP द्वारा जारी किए गए 'Disclaimer of Conclusion' ने और भी चिंताजनक बना दिया है। ऑडिटर ने स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड, दोनों ही स्टेटमेंट्स पर यह गंभीर राय दी है। इसका सीधा मतलब यह है कि ऑडिटर को वित्तीय विवरणों पर अपनी राय बनाने के लिए पर्याप्त और उचित सबूत नहीं मिले, जिसका मुख्य कारण कंपनी के अंदरूनी पुराने मामले हैं।
'Going Concern' पर मंडराया गंभीर खतरा
सबसे बड़ा रेड फ्लैग 'Material uncertainty related to going concern' है। ऑडिटर का कहना है कि कंपनी का नेट वर्थ (Net Worth) बुरी तरह घट गया है, लगातार घाटा हो रहा है, और अपनी देनदारियों (Liabilities) को पूरा करने में कंपनी को मशक्कत करनी पड़ रही है। कंपनी का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि वह कब तक फाइनेंस जुटा पाती है, कैश फ्लो (Cash Flow) कैसे जेनरेट करती है, और सुप्रीम कोर्ट उसके रेजोल्यूशन फ्रेमवर्क पर क्या फैसला सुनाता है। यह अनिश्चितता कंपनी के तत्काल भविष्य पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाती है।
एसेट्स की वैल्यूएशन पर सवाल
इसके अलावा, एसेट्स (Assets) के वैल्यूएशन और उनकी रिकवरेबिलिटी (Recoverability) को लेकर भी ऑडिटर ने कई गंभीर सवाल उठाए हैं। मैनेजमेंट ने सब्सिडियरीज (Subsidiaries), जॉइंट वेंचर्स (Joint Ventures) और एसोसिएट्स (Associates) में अपने भारी निवेश, जो कि स्टैंडअलोन बेसिस पर ₹9,72,22.92 लाख है, का इंपेयरमेंट असेसमेंट (Impairment Assessment) नहीं किया है। साथ ही, एडवांसेज (Advances), ट्रेड रिसीवेबल्स (Trade Receivables) और कॉर्पोरेट गारंटी (Corporate Guarantees) के लिए अनुमानित लॉस अलाउंस (Loss Allowance) के फेयर वैल्यू (Fair Value) पर भी ऑडिटर कोई निष्कर्ष नहीं निकाल सके, क्योंकि पर्याप्त सबूत नहीं थे। GNIDA से ₹18,339.80 लाख की रिकवरी भी कन्फर्मेशन के अधीन है।
ऑपरेशनल और कंप्लायंस कंसर्न्स
एसेट्स के मुद्दों के अलावा, ऑडिटर ने कई बैलेंस शीट आइटम्स (Balance Sheet Items) के लिए पेंडिंग रिकंसिलिएशन (Pending Reconciliation), पिछली मैनेजमेंट के बकाया स्टैच्यूटरी ड्यूज (Statutory Dues), पब्लिक डिपॉजिट्स (Public Deposits) और डेट कोवेनेंट्स (Debt Covenants) के भुगतान में डिफॉल्ट (Default) जैसे मुद्दों को भी उठाया है। ऑडिटर ने रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स के लिए Ind AS 115 के तहत Unitech की रेवेन्यू रिकॉग्निशन पॉलिसीज (Revenue Recognition Policies) पर भी सवाल उठाए हैं। 'Project in Progress' और कस्टमर एडवांसेज (Customer Advances) की सटीकता पर भी संशय जताया गया है, क्योंकि इसमें संभावित ओवरस्टेटमेंट्स (Overstatements) और पेंडिंग रिकंसिलिएशन थे। कंसोलिडेटेड नतीजों में सब्सिडियरीज के ऑडिट/रिव्यू के संबंध में SEBI LODR रेगुलेशन (SEBI LODR Regulations) का अनुपालन न करने का भी खुलासा हुआ है।
निवेशकों के लिए क्या मायने?
ये सारी बातें मिलकर एक ऐसे बिज़नेस की तस्वीर पेश करती हैं जो गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रहा है। ऑडिटर का डिस्क्लेमर (Disclaimer) का मतलब है कि निवेशक पेश किए गए फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स पर भरोसा नहीं कर सकते। Unitech का भविष्य काफी हद तक बाहरी कारकों, खासकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले और बड़ी फाइनेंसिंग जुटाने की क्षमता पर टिका है। पुराने मामले और वित्तीय पारदर्शिता की कमी, ये सभी मिलकर भारी जोखिम पैदा करते हैं, जिससे यह साफ है कि कोई भी निवेश अत्यधिक सट्टा (Speculative) होगा।
