अमेरिकी कंपनियों का दबदबा
इस रिकॉर्ड ऑफिस स्पेस लीजिंग में सबसे बड़ा योगदान अमेरिकी कंपनियों का रहा है। उन्होंने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) के लिए कुल लीजिंग वॉल्यूम का 73% हिस्सा अपने नाम किया। यह दिखाता है कि कैसे भारत ग्लोबल बिज़नेस ऑपरेशन्स के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है।
प्रमुख शहर और वर्कप्लेस की पसंद
अगर शहरों की बात करें तो बेंगलुरु इस मामले में सबसे आगे रहा, जिसने कुल ऑफिस लीजिंग का 29% हिस्सा हासिल किया। दिल्ली-NCR 22% के साथ दूसरे और मुंबई 16% के साथ तीसरे स्थान पर रहा। इन तीनों प्रमुख शहरों ने मिलकर कुल ग्रॉस ऑफिस लीजिंग का लगभग 67% हिस्सा कवर किया। अब कंपनियां ग्रीन सर्टिफिकेशन्स और अच्छी सुविधाओं वाली बिल्डिंग्स को प्राथमिकता दे रही हैं।
अलग-अलग सेक्टर्स और GCCs का विस्तार
ऑफिस स्पेस की यह डिमांड सिर्फ कुछ चुनिंदा सेक्टर्स तक सीमित नहीं है, बल्कि ई-कॉमर्स, टेक्नोलॉजी और BFSI जैसे कई क्षेत्रों में फैली हुई है। इसके अलावा, बड़ी फॉर्च्यून 500 कंपनियों के साथ-साथ मिड-मार्केट और छोटी 'नैनो' GCCs भी ऑफिस लोकेशन्स की तलाश में हैं।
भविष्य में भी जारी रहेगी तेजी?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऑफिस स्पेस लीजिंग की यह रफ्तार 2026 तक जारी रह सकती है। AI-रेडी इंफ्रास्ट्रक्चर और GCCs के मल्टी-फंक्शनल इनोवेशन हब के तौर पर विकास की वजह से ग्लोबल कंपनियां भारत को एक स्ट्रैटेजिक हब के तौर पर देख रही हैं।