UPRERA के सुधारों से रियल एस्टेट में बहार
उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (UPRERA) ने राज्य के रियल एस्टेट सेक्टर में निवेशकों का भरोसा जीतने और इस क्षेत्र में ज़बरदस्त तेज़ी लाने में अहम भूमिका निभाई है। साल 2025 में रियल एस्टेट में कुल निवेश 53.5% की भारी बढ़ोतरी के साथ ₹68,328 करोड़ तक पहुँच गया। डेवलपर्स की सक्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2023 में 197 प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन हुए थे, जो 2025 तक बढ़कर 308 हो गए। यह तेज़ी 2026 के शुरुआती चार महीनों में भी जारी है, जहाँ ₹25,156 करोड़ का निवेश हुआ और 106 प्रोजेक्ट्स रजिस्टर हुए।
हाउसिंग सप्लाई (Housing Supply) में भी बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है। 2025 में प्रस्तावित यूनिट्स में 22.5% का इजाफा हुआ, जो 84,976 यूनिट्स तक पहुँच गई। वहीं, 2026 की शुरुआत में 33,206 यूनिट्स सामने आईं। राष्ट्रीय स्तर पर हाउसिंग सप्लाई में जहां करीब 8-12% की वृद्धि देखी गई, वहीं उत्तर प्रदेश का प्रदर्शन कहीं बेहतर रहा।
NCR से बाहर भी फैला विकास का दायरा
उत्तर प्रदेश के रियल एस्टेट सेक्टर की ग्रोथ अब सिर्फ नोएडा और ग्रेटर नोएडा जैसे पारंपरिक हब तक सीमित नहीं है। लखनऊ अब इस सेक्टर में एक बड़ा खिलाड़ी बनकर उभरा है, जिसने 2025 में गौतम बुद्ध नगर के 69 प्रोजेक्ट्स के मुकाबले 67 प्रोजेक्ट्स रजिस्टर किए। एक्सप्रेस-वे जैसे सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के चलते नए शहर भी निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं।
तुलना करें तो, 2025 में उत्तर प्रदेश का 53.5% का निवेश ग्रोथ महाराष्ट्र ( 18%), बेंगलुरु ( 17%), और हैदराबाद ( 20%) जैसे राज्यों से कहीं आगे रहा। यह दर्शाता है कि UPRERA का रेगुलेटरी मॉडल और विवाद समाधान (Dispute Resolution) तंत्र प्रभावी साबित हो रहा है। 8,000 से ज़्यादा खरीदारों ने सेटलमेंट के ज़रिए ₹2,126 करोड़ वापस पाए हैं, और लगभग ₹5,943 करोड़ के विवादों का निपटारा किया गया है। खरीदारों के लिए यह सीधा समाधान जोखिमों को कम करने वाला एक बड़ा कदम है।
आगे की राह और चुनौतियां
हालांकि, इस शानदार ग्रोथ के बावजूद कुछ चुनौतियां भी हैं। प्रोजेक्ट्स और सप्लाई में तेज़ी से ओवरसप्लाई (Oversupply) का खतरा बढ़ सकता है, अगर मांग कम हुई या विकास का प्रबंधन ठीक से नहीं हुआ। कंस्ट्रक्शन की बढ़ती लागत और लेबर की संभावित कमी डेवलपर्स के मुनाफे पर दबाव डाल सकती है।
UPRERA का विवाद समाधान तंत्र एक मज़बूती है, लेकिन 11,000 से ज़्यादा मामलों का निपटारा यह भी दिखाता है कि विवादों की संख्या काफी अधिक है। भविष्य में ऐसे मामलों के बैकलॉग (Backlog) को संभालने की सिस्टम की क्षमता पर सवाल उठ सकते हैं।
विश्लेषकों का अनुमान है कि 2026 में उत्तर प्रदेश के रियल एस्टेट सेक्टर में ग्रोथ जारी रहेगी, हालांकि थोड़ी धीमी हो सकती है। पारदर्शिता और निवेशक-अनुकूल रवैये पर UPRERA का ज़ोर निवेशकों की रुचि बनाए रखेगा। टियर-II शहरों में विस्तार और सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के सहारे यह राज्य एक महत्वपूर्ण ग्रोथ एरिया बना रहेगा।
