उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (UP RERA) ने होमबायर्स के लिए गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) रिफंड पाने की प्रक्रिया को आसान बना दिया है। अब अगर डेवलपर्स ने ज़्यादा टैक्स वसूला है या प्रोजेक्ट कैंसिल हो गया है, तो बायर्स सीधे GST पोर्टल से रिफंड क्लेम कर सकेंगे।
अब होमबायर्स को मिलेगा GST रिफंड का सीधा रास्ता
UP RERA ने रियल एस्टेट डेवलपर्स को साफ निर्देश दिए हैं कि वे सरकारी दरों के मुताबिक ही GST वसूलें। अगर किसी डेवलपर ने ज़्यादा टैक्स वसूला है या प्रॉपर्टी एग्रीमेंट खत्म हो गया है, तो बायर्स को अब राहत मिलेगी। सबसे अहम बात यह है कि अगर डेवलपर क्रेडिट नोट जारी नहीं करता है, तो खरीदार सीधे GST विभाग से संपर्क कर सकते हैं।
GST पोर्टल से कैसे मिलेगा रिफंड?
जिन होमबायर्स का अपना GST रजिस्ट्रेशन नहीं है, वे 'Refund for Unregistered Person' कैटेगरी में फॉर्म GST RFD-01 भरकर रिफंड का दावा कर सकते हैं। इसके लिए खरीदार को अपना पैन (PAN) नंबर इस्तेमाल करना होगा। क्लेम को सही साबित करने के लिए टैक्स पेमेंट का सबूत, कैंसिलेशन के ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स और डेवलपर से एक सर्टिफिकेशन देना होगा। GST डिपार्टमेंट इन सब की जांच के बाद ही रिफंड जारी करेगा।
यह भी याद रखें कि अगर डेवलपर के पास क्रेडिट नोट जारी करने या टैक्स सहित पूरी रकम वापस करने का कानूनी समय है, तो उसकी ज़िम्मेदारी वही होगी। UP RERA ने यह भी साफ किया है कि जो बिल्डर्स गलत तरीके से टैक्स वसूलते हैं, उन पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी।
रिफंड के लिए ज़रूरी बातें
- समय-सीमा: एग्रीमेंट कैंसिलेशन या टर्मिनेशन की तारीख से 2 साल के अंदर रिफंड क्लेम करना होगा।
- न्यूनतम राशि: ₹1,000 से कम के रिफंड क्लेम पर कार्रवाई नहीं की जाएगी।
यह नया नियम खरीदारों और डेवलपर्स के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अटके या कैंसल हुए प्रोजेक्ट्स के खरीदारों के लिए यह जानना ज़रूरी है कि डेवलपर से सर्टिफिकेशन लेना रिफंड प्रोसेस के लिए बहुत ज़रूरी है। ऐसे में, खरीदारों को अपने डेवलपर्स के साथ हुए सभी कम्युनिकेशन और पेमेंट की रसीदें संभाल कर रखनी चाहिए।
