उत्तर प्रदेश सरकार ने 'डेटा सेंटर पॉलिसी 2026' को मंजूरी दे दी है। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य में **₹2 लाख करोड़** के निवेश को आकर्षित करना और **2 गीगावाट (GW)** की नई क्षमता जोड़ना है। राज्य का फोकस ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर और AI-रेडी सुविधाओं पर है ताकि वह राष्ट्रीय डेटा हब के तौर पर अपनी पहचान बना सके।
ग्रीन एनर्जी और AI पर खास जोर
उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने डेटा सेंटर पॉलिसी 2026 को आधिकारिक तौर पर हरी झंडी दिखा दी है। इस कदम से राज्य डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक प्रमुख गंतव्य बनने की राह पर है। इस नई पॉलिसी के तहत, राज्य ₹2 लाख करोड़ का निवेश जुटाना चाहता है और डेटा सेंटर की कुल क्षमता को 2 गीगावाट (GW) तक बढ़ाना चाहता है। यह नई पॉलिसी 2021 की पुरानी नीति की जगह लेगी, जिसने पहले ही ₹21,343 करोड़ के निवेश से सात प्रोजेक्ट्स को शुरू करने में मदद की थी।
इस अपडेटेड पॉलिसी का एक अहम हिस्सा ग्रीन एनर्जी और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग की ओर बढ़ना है। सरकार विशेष रूप से GPU-आधारित डेटा सेंटरों के लिए प्रोत्साहन दे रही है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के भारी-भरकम वर्कलोड को संभालने के लिए बेहद जरूरी हैं। ऊर्जा दक्षता और स्थायी परिचालन प्रथाओं को प्राथमिकता देकर, राज्य उन ग्लोबल टेक्नोलॉजी कंपनियों को आकर्षित करने की उम्मीद कर रहा है, जिनके पास डेटा स्टोरेज के लिए सख्त पर्यावरण मानक हैं।
क्षेत्रीय विकास और रोजगार
राज्य के सभी हिस्सों में समान विकास सुनिश्चित करने के लिए, पॉलिसी में बुंदेलखंड और पूर्वांचल क्षेत्रों में स्थित प्रोजेक्ट्स के लिए विशेष प्रोत्साहन शामिल किए गए हैं। इन इलाकों में ऐतिहासिक रूप से नोएडा और ग्रेटर नोएडा जैसे क्षेत्रों की तुलना में कम औद्योगिक निवेश देखा गया है। सरकार को उम्मीद है कि यह भौगोलिक फोकस, टियर-3 और टियर-4 डेटा सेंटरों के समर्थन के साथ, एक बड़ा इकोसिस्टम तैयार करेगा। सरकारी अनुमानों के अनुसार, इस पहल से लगभग 7,500 सीधी, दीर्घकालिक नौकरियां और इन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के निर्माण के दौरान लगभग 50,000 अस्थायी नौकरियां पैदा होंगी।
प्रतिस्पर्धा और आगे की राह
Uttar Pradesh इस समय तेलंगाना जैसे अन्य राज्यों के साथ बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर ऑपरेटर्स को आकर्षित करने की दौड़ में है। जैसे-जैसे भारत में डिजिटलीकरण तेज हो रहा है, लोकल डेटा प्रोसेसिंग और स्टोरेज की मांग काफी बढ़ गई है। हालांकि, इस क्षेत्र में निवेश करने वालों के लिए, इन प्रोजेक्ट्स का जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन (Execution) महत्वपूर्ण होगा। सरकारी प्रोत्साहन बुनियादी ढांचा स्थापित करने की शुरुआती लागत को कम कर सकते हैं, लेकिन इन डेटा सेंटरों की सफलता लगातार बिजली आपूर्ति, हाई-स्पीड फाइबर कनेक्टिविटी और कुशल तकनीकी कर्मचारियों की स्थिर आपूर्ति पर निर्भर करेगी। इस सेक्टर पर नजर रखने वाले निवेशकों को आने वाली तिमाहियों में इन नई सुविधाओं की घोषणाओं और जमीनी प्रगति पर नजर रखनी चाहिए।
