Tier II रियल एस्टेट में 14% सालाना ग्रोथ! प्रीमियम घरों की मांग बढ़ी, पर affordability बनी चिंता

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AuthorAditya Rao|Published at:
Tier II रियल एस्टेट में 14% सालाना ग्रोथ! प्रीमियम घरों की मांग बढ़ी, पर affordability बनी चिंता

भारत के Tier II शहरों में रेजिडेंशियल रियल एस्टेट सेक्टर 14% की सालाना दर से बढ़ रहा है, जो FY2026 तक जारी रहने का अनुमान है। इंफ्रास्ट्रक्चर और शहरी विकास इस ग्रोथ को बढ़ावा दे रहे हैं। Godrej Properties और Sobha जैसी बड़ी कंपनियां भी इस मौके का फायदा उठाने के लिए आगे आ रही हैं, लेकिन प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमतें कुछ खरीदारों के लिए affordability को एक चुनौती बना रही हैं।

Tier II शहरों में रियल एस्टेट की बहार

भारत के Tier II शहरों में रेजिडेंशियल रियल एस्टेट सेक्टर ज़बरदस्त ग्रोथ दिखा रहा है। Crisil Intelligence के अनुमान के मुताबिक, FY2021 से FY2026 के बीच यह सेक्टर 14% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़ सकता है। खासकर, नागपुर, कोयंबटूर और लखनऊ जैसे शहर तो 20% की दर से भी ज़्यादा तेजी से बढ़ रहे हैं। इसका मुख्य कारण बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकारी खर्च में बढ़ोतरी है, जिससे रीजनल कनेक्टिविटी मजबूत हो रही है।

बड़े डेवलपर्स की एंट्री

इस बढ़ती डिमांड को देखते हुए, बड़े और ऑर्गनाइज्ड डेवलपर्स अब उन मार्केट्स में भी दस्तक दे रहे हैं, जहाँ पहले छोटे लोकल प्लेयर्स का दबदबा था। Godrej Properties, Phoenix Mills और Sobha जैसी कंपनियां इन शहरों में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं, ताकि बड़े और प्रीमियम घरों की बढ़ती मांग का फायदा उठा सकें। इन बड़ी कंपनियों की एंट्री खास है, क्योंकि वे अक्सर छोटे रीजनल फर्मों की तुलना में प्रोजेक्ट्स को बेहतर तरीके से एग्जीक्यूट कर पाती हैं।

सप्लाई पर कंट्रोल

रियल एस्टेट सेक्टर में पहले सप्लाई की कमी (supply glut) से बचने के लिए, डेवलपर्स ने पिछले दो फाइनेंशियल ईयर में नए प्रोजेक्ट्स लॉन्च करने की रफ़्तार धीमी कर दी है। मौजूदा रणनीति यह है कि बिना बिकी इन्वेंटरी (unsold inventory) को सेल्स के 15 से 20 महीने के लेवल पर बनाए रखा जाए। सप्लाई पाइपलाइन को कंट्रोल करके, कंपनियां कीमतों को स्थिर रखने और इन उभरते मार्केट्स में अचानक बड़ी गिरावट के जोखिम को कम करने का लक्ष्य रख रही हैं।

खरीदारों की बदलती पसंद और affordability

मार्केट डेटा बताता है कि पिछले पांच सालों में 2BHK और 3BHK अपार्टमेंट की मांग बढ़ी है, जो कुल हाउसिंग सप्लाई का 75% से ज़्यादा है। हालांकि, इन बड़े और प्रीमियम घरों की वजह से लखनऊ, इंदौर और भुवनेश्वर जैसे शहरों में प्रॉपर्टी की औसत कीमत ₹1 करोड़ के पार पहुंच गई है। यह बढ़ती कीमतें वॉल्यूम ग्रोथ के लिए एक जोखिम पैदा कर सकती हैं, क्योंकि इससे खरीदारों का दायरा सिकुड़ सकता है।

मार्केट का दो हिस्सों में बंटवारा

Tier II शहरों के रियल एस्टेट ट्रेंड्स दो अलग-अलग कैटेगरी में बंटते दिख रहे हैं। इंदौर, लखनऊ और सूरत जैसे प्रीमियम-फोक्स्ड मार्केट्स में हाई-एंड प्रॉपर्टी की सप्लाई बढ़ रही है, जहाँ 20% से ज़्यादा प्रॉपर्टी ₹2 करोड़ से महंगी हैं। यह आईटी सेक्टर के विस्तार और लोकल एंटरप्रेन्योरियल वेल्थ से प्रेरित है। वहीं, वडोदरा, नासिक, नागपुर और जयपुर जैसे इंडस्ट्रियल हब मिड-सेगमेंट पर केंद्रित हैं, जहाँ 75% से ज़्यादा नई सप्लाई ₹75 लाख से कम की है। ये शहर affordability पर ज़ोर दे रहे हैं, जिससे होम लोन की मांग बनी हुई है और बिक्री की मात्रा भी बढ़ रही है। देखना यह होगा कि क्या ये शहर डेवलपर्स द्वारा हाई-वैल्यू प्रोडक्ट्स पर फोकस करने के बावजूद सप्लाई और affordability के बीच संतुलन बनाए रख पाते हैं।

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