टियर-II रियल एस्टेट में बड़ा खेल: वॉल्यूम गिरा, प्रीमियम सेगमेंट ने संभाली मार्केट!

REAL-ESTATE
Whalesbook Logo
AuthorSaanvi Reddy|Published at:
टियर-II रियल एस्टेट में बड़ा खेल: वॉल्यूम गिरा, प्रीमियम सेगमेंट ने संभाली मार्केट!
Overview

टियर-II भारतीय शहरों में 2025 में प्रॉपर्टी की बिक्री (sales volume) **10%** घटकर **1.56 लाख यूनिट** रह गई। वहीं, कुल बिक्री का मूल्य (sales value) **₹1.48 लाख करोड़** पर स्थिर बना हुआ है।

टियर-II रियल एस्टेट में बड़ा बंटवारा

2025 में, भारत के 15 प्रमुख टियर-II शहरों में प्रॉपर्टी की बिक्री का वॉल्यूम 10% सिकुड़कर 1,56,181 यूनिट तक पहुंच गया। हालांकि, बिक्री के कुल मूल्य (sales value) में कोई बड़ी गिरावट नहीं आई और यह पूरे साल ₹1.48 लाख करोड़ पर स्थिर रहा। यह साफ दिखाता है कि मार्केट में एक बड़ा बंटवारा (bifurcation) हो रहा है। सस्ते घरों की सप्लाई कम हो रही है, जबकि महंगे सेगमेंट में डिमांड और बिक्री मूल्य (sales value) बढ़ रहा है। यह ट्रेंड बड़े मेट्रो शहरों (tier-I cities) जैसा ही है, जहाँ पिछले कुछ सालों से यूनिट बिक्री कम होने के बावजूद प्रॉपर्टी की कीमतें बढ़ रही हैं।

महंगा हो रहा है सस्ता घर

इस वॉल्यूम में गिरावट की सबसे बड़ी वजह ₹1 करोड़ से कम कीमत वाले घरों की घटती उपलब्धता है। यही वो सेगमेंट था जो आमतौर पर टियर-II शहरों में डिमांड का बड़ा आधार था। बढ़ती कंस्ट्रक्शन कॉस्ट (construction costs) ने इसे बुरी तरह प्रभावित किया है। पिछले पांच सालों में कंस्ट्रक्शन कॉस्ट में करीब 40% का इजाफा हुआ है। इसकी वजह लेबर कॉस्ट में 150% तक और स्टील व सीमेंट की कीमतों में 30-57% तक की बढ़ोतरी है। नतीजतन, नए लॉन्च (new launches) में किफायती घरों (affordable housing) का हिस्सा 2019 में 40% से घटकर 2025 की पहली छमाही तक सिर्फ 12% रह गया है। डेवलपर्स के लिए ₹1 करोड़ से कम के प्रोजेक्ट बनाना मुश्किल हो गया है।

प्रीमियम सेगमेंट की धाक

दूसरी ओर, ₹1 करोड़ से ऊपर के घरों के मार्केट में मजबूती देखी जा रही है। इस प्रीमियम सेगमेंट में बिक्री 9% बढ़ी है, और कुल मार्केट में इसका हिस्सा पिछले साल के 23% से बढ़कर 28% हो गया है। इस बढ़त के पीछे कई कारण हैं, जैसे बढ़ती हाउसहोल्ड इनकम, लोगों की लाइफस्टाइल और बड़े घरों की चाहत, और टियर-II शहरों में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर। एक्सपर्ट्स का कहना है कि खरीदार अब लाइफस्टाइल, कम्युनिटी लिविंग और बड़े घरों को प्राथमिकता दे रहे हैं, भले ही कीमत ज्यादा हो। यह ट्रेंड पूरे देश में दिख रहा है, जहाँ ₹2-5 करोड़ वाले घरों की बिक्री में अच्छा उछाल आया है।

रीजनल गेम और टियर-I की राह पर

हालांकि, प्रीमियमाइजेशन का यह ट्रेंड हर जगह एक जैसा नहीं है। विशाखापत्तनम और भुवनेश्वर जैसे शहरों में बिक्री में भारी गिरावट (क्रमशः 38% और 25%) आई, जबकि मोहाली (+34%) और लखनऊ (+6%) जैसे शहरों में ग्रोथ दिखी। खास बात यह है कि अहमदाबाद अब अपने डेवलपमेंट और डिमांड के चलते टियर-I सिटी माना जाने लगा है। अब टियर-II शहरों का प्रदर्शन बड़े शहरों (tier-I markets) जैसा ही हो गया है, जहाँ यूनिट वॉल्यूम घटने के बावजूद प्रीमियम प्रॉपर्टी की वजह से बिक्री मूल्य रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया है। उदाहरण के लिए, 2025 की पहली छमाही में टियर-I शहरों में ₹3.6 लाख करोड़ की बिक्री हुई, जो पिछले साल के मुकाबले 9% ज्यादा है, और एवरेज टिकट साइज में 14% का इजाफा हुआ।

मार्केट के रिस्क

इस बदलते मार्केट में कुछ रिस्क भी हैं। किफायती घरों की सप्लाई में भारी कमी और बढ़ती कीमतें आम खरीदारों के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं। प्रीमियम सेगमेंट की ग्रोथ अगर सिर्फ एक खास वर्ग की इनकम पर निर्भर रही, तो यह आर्थिक मंदी या खर्च में बदलाव के प्रति संवेदनशील हो सकता है। इसके अलावा, अगर टियर-II शहरों में नए प्रीमियम प्रोजेक्ट्स डिमांड से ज्यादा आ गए, तो ओवरसप्लाई (oversupply) का खतरा भी है। मार्केट एनालिस्ट फर्म P E Analytics Ltd, जिसका मार्केट कैप करीब ₹209 करोड़ और TTM P/E रेशियो 16-17x है, रियल एस्टेट डेटा एनालिटिक्स मार्केट से जुड़ी है। लेकिन असली रिस्क फर्म में नहीं, बल्कि खुद मार्केट की चाल में है - एक ऐसा मार्केट जो बंटता जा रहा है और भविष्य में कीमतों में करेक्शन (price correction) का सामना कर सकता है। टियर-II शहरों में ऐतिहासिक रूप से प्रॉपर्टी की कीमतों में तेजी (कभी-कभी 65% से ज्यादा एक साल में) देखी गई है, जो कई लोगों की इनकम ग्रोथ से ज्यादा हो सकती है।

भविष्य का नज़रिया

2026 की बात करें तो, भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर, जिसमें टियर-II शहर भी शामिल हैं, में लगातार और व्यापक ग्रोथ की उम्मीद है। हाउसिंग फाइनेंस की बेहतर उपलब्धता, खरीदारों की मांग और सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स इस मार्केट को सपोर्ट करेंगे। लग्जरी और हाई-एंड घरों की डिमांड बढ़ने की उम्मीद है, जो बढ़ती इनकम और NRI इन्वेस्टमेंट्स से प्रेरित होगी। हालांकि, यह ग्रोथ ज्यादा सधी हुई होगी, जिसमें एक्सिक्यूशन स्ट्रेंथ और कैपिटल प्रूडेंस पर फोकस रहेगा। खरीदारों की प्राथमिकताएं बदल रही हैं, वे अब सिर्फ दिखावे से ज्यादा लॉन्ग-टर्म वैल्यू, टिकाऊपन और मेंटेनेंस को महत्व दे रहे हैं। सरकार द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर पर बजट आवंटन टियर-II और टियर-III शहरों में डिमांड और रोजगार को और बढ़ाएगा, जिससे वे भविष्य के ग्रोथ इंजन बनेंगे।

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.