Tier 2 शहरों में घर खरीदना हुआ महंगा? ₹40 लाख के लोन के लिए चाहिए तगड़ी कमाई!

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AuthorNeha Patil|Published at:
Tier 2 शहरों में घर खरीदना हुआ महंगा? ₹40 लाख के लोन के लिए चाहिए तगड़ी कमाई!
Overview

टियर 2 शहरों में घर खरीदने का प्लान बना रहे लोगों को अब अपनी कमाई और खर्चों का खास ध्यान रखना होगा। ₹35-40 लाख की प्रॉपर्टी के लिए होम लोन (Home Loan) लेने वालों के लिए बैंक और वित्तीय संस्थान अब कुछ कड़े नियम अपना रहे हैं।

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होम लोन के लिए क्या हैं नई जरूरतें?

भारत के टियर 2 शहरों में प्रॉपर्टी खरीदने के लिए अब खरीदारों को पहले से ज्यादा समझदार और वित्तीय रूप से मजबूत होने की जरूरत है। अगर आप इन शहरों में करीब ₹35-40 लाख की प्रॉपर्टी देख रहे हैं, तो लगभग ₹28-32 लाख का लोन मिलना आपकी वित्तीय प्लानिंग पर निर्भर करेगा।

बैंक आपकी लोन चुकाने की क्षमता और क्रेडिट व्यवहार को बारीकी से परख रहे हैं। इसके लिए, आपकी मंथली इनकम टैक्स कटने के बाद ₹30,000 से ₹75,000 के बीच होनी चाहिए, जो आपके मौजूदा वित्तीय खर्चों पर भी निर्भर करती है।

फिक्स्ड ऑब्लिगेशन्स टू इनकम रेशियो (FOIR) एक अहम फैक्टर है, जिसे बैंक 40-45% के आसपास रखना चाहते हैं। इसका मतलब है कि आपके EMI और दूसरे मंथली खर्च आपकी कुल इनकम का आधे से कम हों। अगर आप ₹28-32 लाख का लोन 20 साल के लिए लेते हैं, तो आपकी EMI करीब ₹25,000 से ₹27,000 बन सकती है।

क्रेडिट स्कोर की बात करें तो, 750 या उससे ऊपर का स्कोर लोन जल्दी अप्रूव कराने और बेहतर इंटरेस्ट रेट पाने के लिए स्टैंडर्ड माना जाता है। 700 से 749 के बीच का स्कोर भी काम कर सकता है, लेकिन कम स्कोर होने पर लोन के लिए को-एप्लीकेंट (Co-applicant) जोड़ना या छोटे-मोटे कर्जों को चुकाना बेहतर रहेगा।

लोन-टू-वैल्यू (LTV) रेश्यो प्रॉपर्टी की कीमत के 80% तक सीमित है। इसका मतलब है कि आपको प्रॉपर्टी की कीमत का कम से कम 20% डाउन पेमेंट (Down Payment) के तौर पर देना होगा। बैंक आपकी नौकरी की स्थिरता, लगातार इनकम और क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल (जो 30% से कम हो तो बेहतर) को भी देखते हैं।

टियर 2 शहर क्यों बन रहे हैं होम लोन का हब?

भारत में होम लोन की ग्रोथ अब टियर 2 और टियर 3 शहरों की ओर तेजी से बढ़ रही है। 2025 में कुल होम लोन का 64% इन्हीं छोटे शहरों से आया, जो पिछले साल के मुकाबले 81% ज्यादा है। यह टियर 1 शहरों की 52% ग्रोथ से काफी आगे है। इसकी मुख्य वजह बड़े शहरों में प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमतें हैं, जिससे लोग सस्ते और बेहतर विकल्प तलाश रहे हैं।

बैंक भी इस ट्रेंड के साथ तालमेल बिठा रहे हैं। हालांकि इंटरेस्ट रेट प्रोफाइल पर निर्भर करते हैं, सरकारी बैंकों से लोन 7.10% प्रति वर्ष से शुरू हो सकते हैं। RBI के रेपो रेट (Repo Rate) में बदलाव सीधे तौर पर फ्लोटिंग EMI को प्रभावित करते हैं।

टियर 2 मार्केट में संभावित जोखिम

50 लाख रुपये से कम कीमत वाले घरों की डिमांड में 17% की गिरावट देखी गई है, जो इस सेगमेंट पर फोकस करने वाली कंपनियों के लिए चुनौती बन सकती है। ऐसे में, बैंक अपनी लोन देने की शर्तों को और कड़ा कर सकते हैं।

खरीदार अगर मैक्सिमम LTV रेश्यो का इस्तेमाल करते हैं या EMI कम रखने के लिए लोन की अवधि (Tenure) बढ़ाते हैं, तो उन्हें कुल मिलाकर ज्यादा ब्याज चुकाना पड़ सकता है। इससे वे ब्याज दरों में बढ़ोतरी के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.