थाइलैंड के थाणे शहर में अमेज़न (Amazon) के **422 MW** के नए डेटा सेंटर प्रोजेक्ट को लेकर स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। लोगों का कहना है कि इस प्रोजेक्ट से इलाके के इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण पर बुरा असर पड़ेगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण पर बड़ा खतरा?
थाणे के हजारों निवासी अमेज़न (Amazon) के इस बड़े डेटा सेंटर प्रोजेक्ट के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। लोगों का कहना है कि 422 MW क्षमता वाले इस डेटा सेंटर के पास में होने से उनके घरों और स्कूलों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
'थाणे वेस्ट अर्बनाइजेशन टास्कफोर्स' के बैनर तले इकट्ठा हुए लोगों ने प्रोजेक्ट के पानी और बिजली की सप्लाई पर पड़ने वाले भारी बोझ को लेकर चिंता जताई है। इतना ही नहीं, प्रोजेक्ट के एनवायरनमेंटल इम्पैक्ट असेसमेंट (Environmental Impact Assessment) में 193 डीजल जेनरेटर के इस्तेमाल का ज़िक्र होने से ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution) और वायु गुणवत्ता (Air Quality) को लेकर भी लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं। इसके अलावा, बढ़ते ट्रैफिक जाम और हरे-भरे इलाकों के खत्म होने का डर भी सता रहा है।
अमेज़न का पक्ष
इन चिंताओं पर अमेज़न (Amazon) ने सफाई देते हुए कहा है कि यह डेटा सेंटर स्थानीय पावर ग्रिड से अलग काम करेगा और इसकी अपनी डेडिकेटेड सबस्टेशन (Dedicated Substation) होगी। कंपनी का यह भी कहना है कि भारत में उनके डेटा सेंटर कूलिंग के लिए पानी का इस्तेमाल नहीं करते और वे पर्यावरण के मानकों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
आगे क्या होगा?
हालांकि, कंपनी के इन दावों के बावजूद स्थानीय लोग मानने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने पानी की सप्लाई, सीवेज ट्रीटमेंट प्लान (Sewage Treatment Plan) और थाणे क्रीक (Thane Creek) के इकोसिस्टम पर पड़ने वाले थर्मल इम्पैक्ट (Thermal Impact) को लेकर और ज़्यादा पारदर्शिता की मांग की है। थाणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (Thane Municipal Corporation) इस मामले को लेकर एक्शन में आ गया है और उसने इस मुद्दे को सरकारी अथॉरिटीज तक पहुंचाया है।
यह मामला बड़े डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करता है। भारत की बढ़ती डिजिटल इकोनॉमी के लिए डेटा सेंटर ज़रूरी हैं, लेकिन अब ऐसे प्रोजेक्ट्स को स्थानीय समुदाय की चिंताओं, खासकर यूटिलिटी (Utility) के इस्तेमाल और पर्यावरण के नियमों के पालन को लेकर, का सामना करना पड़ रहा है।
