Telangana RERA ने पजेशन में **18 महीने** की देरी करने वाले एक बिल्डर पर सख्त कार्रवाई की है। अथॉरिटी ने बिल्डर को होमबायर को **10.7%** सालाना ब्याज देने का आदेश दिया है और बिना अनुमति के वसूले गए **₹30,000** के 'डेब्रीज फीस' को भी रद्द कर दिया है।
कोविड का बहाना नहीं आया काम
सुनाई के दौरान बिल्डर ने प्रोजेक्ट में देरी के लिए कोविड-19 महामारी और लेबर की कमी को जिम्मेदार ठहराया था। हालांकि, रेगुलेटर ने इस तर्क को पूरी तरह खारिज कर दिया। अथॉरिटी ने पाया कि सेल एग्रीमेंट महामारी के बाद साइन किया गया था, इसलिए बिल्डर इसका फायदा नहीं उठा सकता। यह फैसला इस बात को पुख्ता करता है कि बिल्डर्स को तय समय सीमा का पालन करना ही होगा।
अवैध वसूली पर रोक
अथॉरिटी ने बिल्डर द्वारा होमबायर से मांगे गए ₹30,000 के 'डेब्रीज फीस' (मलबा शुल्क) को भी अवैध करार दिया। रेगुलेटर के मुताबिक, यह चार्ज ओरिजिनल एग्रीमेंट का हिस्सा नहीं था और RERA एक्ट का उल्लंघन था। बिल्डर को अब यह पैसा वापस करना होगा। बता दें कि होमबायर पहले ही फ्लैट के लिए ₹44.36 लाख की वैल्यू में से ₹40 लाख से ज्यादा का भुगतान कर चुका था।
होमबॉयर्स के लिए सबक
इस फैसले से प्रभावित खरीदार को बड़ी राहत मिली है। बिल्डर को अब 60 दिन के भीतर ब्याज का पूरा भुगतान करना होगा। यह केस सभी प्रॉपर्टी खरीदारों के लिए एक बड़ा सबक है कि एग्रीमेंट साइन करने से पहले उसमें लिखे हर क्लॉज को बारीकी से पढ़ें, ताकि भविष्य में छिपे हुए खर्चों (Hidden Charges) से बचा जा सके।
