Telangana Govt और SBI के बीच हुआ समझौता, Raidurg ज़मीन विवाद का पटाक्षेप

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Telangana Govt और SBI के बीच हुआ समझौता, Raidurg ज़मीन विवाद का पटाक्षेप

तेलंगाना सरकार और SBI के बीच Raidurg की 5 एकड़ ज़मीन को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद अब सुलझ गया है। बैंक अपनी हाई कोर्ट याचिका वापस लेगा और सरकार द्वारा प्रस्तावित वैकल्पिक ज़मीन स्वीकार करेगा। इस समझौते से दोनों के बीच तनाव खत्म हो गया है।

क्या हुआ?

तेलंगाना सरकार और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने हैदराबाद के Raidurg इलाके में 5 एकड़ ज़मीन के मालिकाना हक को लेकर चल रहे विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान निकाल लिया है। सचिवालय में हुई उच्च स्तरीय बातचीत के बाद, दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए हैं कि बैंक राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित वैकल्पिक ज़मीन के पार्सल स्वीकार करेगा। इसके परिणामस्वरूप, SBI ने तेलंगाना हाई कोर्ट में मूल ज़मीन की नीलामी को चुनौती देने वाली अपनी कानूनी याचिका वापस लेने पर सहमति जताई है।

निवेशकों के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है?

निवेशकों और स्टेकहोल्डर्स के लिए, यह समाधान एक प्रमुख राज्य सरकार और देश के सबसे बड़े पब्लिक सेक्टर बैंक के बीच चल रहे टकराव को खत्म करता है। यह विवाद तब और बढ़ गया था जब तेलंगाना इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर कॉर्पोरेशन (TGIIC) ने Raidurg की ज़मीन की नीलामी की, जिसकी बोलियां ₹200 करोड़ प्रति एकड़ से अधिक बताई जा रही थीं। इसके बाद SBI ने हाई कोर्ट से स्टे की मांग की थी। इस टकराव से अनिश्चितता पैदा हो गई थी, और ऐसी खबरें थीं कि राज्य सरकार अपने बैंकिंग खातों और जमाओं को अन्य संस्थानों में स्थानांतरित करने पर विचार कर रही थी। यह समझौता दोनों संस्थाओं के बीच परिचालन संबंधों में स्थिरता की वापसी का संकेत देता है।

ज़मीन विवाद की पृष्ठभूमि

यह विवाद 2010 का है, जब तत्कालीन राज्य सरकार ने पूर्व स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद (जो बाद में SBI में विलय हो गया) को कॉर्पोरेट मुख्यालय के निर्माण के लिए 5 एकड़ का प्लॉट आवंटित किया था। हालांकि, बैंक ने वर्षों तक इस साइट पर निर्माण कार्य शुरू नहीं किया। 2021 में, राज्य सरकार ने निर्माण की कमी का हवाला देते हुए आवंटन रद्द कर दिया और बाद में TGIIC के माध्यम से नीलामी प्रक्रिया शुरू की। SBI ने ज़मीन पर अपना दावा बनाए रखा, जिससे कानूनी गतिरोध पैदा हुआ, जिसे अब नए समझौते के माध्यम से संबोधित किया गया है।

आगे का रास्ता

राज्य के अधिकारियों और वरिष्ठ SBI प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत के बाद अंतिम रूप दिए गए इस समझौते के लिए आगे औपचारिक कदम उठाने होंगे। आधिकारिक संचार के अनुसार, अगले चरण में बैंक अपने निदेशक मंडल से औपचारिक मंजूरी प्राप्त करेगा। एक बार यह आंतरिक मंजूरी मिल जाने के बाद, बैंक लंबित अदालती मामले को वापस लेने और ज़मीन की अदला-बदली को अंतिम रूप देने के लिए आवश्यक वैधानिक औपचारिकताएं पूरी करेगा।

आगे क्या देखना है?

निवेशकों और पर्यवेक्षकों को हाई कोर्ट में मामले के औपचारिक समापन पर नज़र रखनी चाहिए, जो समझौते की अंतिम कानूनी पुष्टि के रूप में काम करेगा। इसके अतिरिक्त, वैकल्पिक ज़मीन हस्तांतरण को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया समझौते को लागू करने में अगला व्यावहारिक कदम होगा। यह समाधान प्रभावी रूप से बैंक से राज्य सरकार के वित्तीय व्यवसाय को वापस लेने के जोखिम को समाप्त करता है, जिससे दोनों पक्ष इस संघर्ष से आगे बढ़ सकेंगे।

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