बेंगलुरु, पुणे और गुरुग्राम जैसे बड़े टेक हब में सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल्स ने नौकरी जाने के डर और Hiring में सावधानी के चलते घर खरीदने के फैसले टाल दिए हैं। इससे इन शहरों में घरों की बिक्री धीमी पड़ गई है, हालांकि लग्जरी सेगमेंट में अभी भी मजबूती बनी हुई है।
टेक हब में प्रॉपर्टी मार्केट में आई नरमी
भारत के प्रमुख टेक शहरों में रेजिडेंशियल रियल एस्टेट मार्केट एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल्स अब घर खरीदने से पहले "Wait and Watch" की रणनीति अपना रहे हैं। ग्लोबल और डोमेस्टिक टेक कंपनियों में लगातार हो रही छंटनी (Layoffs) और Hiring में धीमी रफ्तार के चलते मिड-इनकम खरीदारों के बीच एक तरह का डर का माहौल है। ये खरीदार, खासकर बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और गुरुग्राम जैसे शहरों में, प्रॉपर्टी की डिमांड के मुख्य जरिया रहे हैं।
बिक्री और इन्वेंट्री पर असर
इंडस्ट्री के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 2026 की दूसरी तिमाही में भारत के टॉप सात शहरों में रेजिडेंशियल बिक्री में पिछले साल की तुलना में 6% की गिरावट दर्ज की गई है। प्रीमियम और अल्ट्रा-लग्जरी सेगमेंट ने भले ही अपनी मजबूती बनाए रखी हो, लेकिन बड़े मार्केट में unsold प्रॉपर्टी का स्टॉक बढ़ता जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत के टॉप आठ शहरों में unsold इन्वेंट्री का आंकड़ा 5.2 लाख यूनिट के पार पहुंच गया है। अगर मिड-मार्केट सेगमेंट में डिमांड इसी तरह धीमी रही तो डेवलपर्स पर सप्लाई को कंट्रोल करने का दबाव आ सकता है।
मार्केट सेगमेंटेशन और बायर सेंटिमेंट
रियल एस्टेट मार्केट अब अलग-अलग सेगमेंट में बंटता दिख रहा है। हाई-नेट-वर्थ वाले खरीदार, जिनमें सीनियर प्रोफेशनल्स और एनआरआई (NRI) शामिल हैं, प्रीमियम प्रॉपर्टी सेगमेंट में खरीदारी जारी रखे हुए हैं। वहीं, मिड-इनकम वाले सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल्स, जो अपनी जॉब सिक्योरिटी और इनकम ग्रोथ को लेकर ज्यादा संवेदनशील होते हैं, वे लंबे समय के फाइनेंशियल कमिटमेंट से बच रहे हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह हाउसिंग डिमांड में कोई बड़ी स्ट्रक्चरल गिरावट नहीं है, बल्कि टेक सेक्टर में अनिश्चितता के चलते खरीदारों का फैसला लेने में एक अस्थायी ठहराव है।
आईटी कॉरिडोर्स का फ्यूचर आउटलुक
भारतीय रेजिडेंशियल मार्केट के लॉन्ग-टर्म फंडामेंटल्स, जैसे कि तेजी से शहरीकरण और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स का विस्तार, अभी भी मजबूत हैं। इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि मार्केट की रफ्तार नई Hiring पर ज्यादा निर्भर करेगी, न कि मौजूदा छंटनी की लहर पर। अगर टेक सेक्टर में Hiring की रफ्तार स्थिर होती है, तो IT प्रोफेशनल्स की अटकी हुई डिमांड वापस आ सकती है। फिलहाल, निवेशकों और स्टेकहोल्डर्स के लिए सबसे अहम है बड़ी टेक कंपनियों से आने वाले Hiring के आंकड़े, जो प्रमुख IT कॉरिडोर्स में मिड-इनकम खरीदारों के कॉन्फिडेंस लेवल को तय करेंगे।
