Telecom Regulatory Authority of India (TRAI) ने बिल्डिंग्स के लिए नया 'डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग' (DCR) फ्रेमवर्क पेश किया है। इसका मकसद घरों और ऑफिसों में नेटवर्क की समस्या को जड़ से खत्म करना है। फिलहाल यह स्वैच्छिक है, लेकिन निवेशकों के लिए यह रियल एस्टेट में बढ़ते खर्च और टेलीकॉम सेक्टर के लिए बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के नए अवसर खोल सकता है।
भारत में अब बिल्डिंग्स के डिजाइन का तरीका बदलने वाला है। Telecom Regulatory Authority of India (TRAI) एक स्वैच्छिक 'डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग' (DCR) फ्रेमवर्क को बढ़ावा दे रहा है, ताकि इमारतों के अंदर मोबाइल नेटवर्क की खराब क्वालिटी की समस्या को दूर किया जा सके। TRAI चाहता है कि बिल्डर्स निर्माण के समय ही डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को प्राथमिकता दें, ताकि बाद में महंगी रिपेयरिंग न करानी पड़े।
कैसे काम करेगा यह रेटिंग सिस्टम?
मई 2026 में अपडेट किए गए इस DCR फ्रेमवर्क में 9-लेवल का स्टार रेटिंग सिस्टम रखा गया है। यह रेटिंग तीन चरणों में मिलेगी: प्लानिंग, कंस्ट्रक्शन और फाइनल ऑपरेशन। यह बिल्कुल एनर्जी एफिशिएंसी रेटिंग जैसा होगा, जिससे खरीदारों और किरायेदारों को प्रॉपर्टी लेने से पहले पता चल सकेगा कि वहां इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क की क्या स्थिति है।
निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
रियल एस्टेट डेवलपर्स के लिए अब कंस्ट्रक्शन के दौरान Distributed Antenna Systems (DAS) और In-building Solutions (IBS) पर खर्च बढ़ सकता है। हालांकि, जो डेवलपर्स इसे अपनाएंगे, वे अपनी प्रॉपर्टी को 'डिजिटल रेडी' प्रीमियम पर बेच सकते हैं। वहीं, टेलीकॉम कंपनियों के लिए यह गेम-चेंजर हो सकता है, क्योंकि इससे कॉल ड्रॉप कम होंगे और नेटवर्क मेंटेनेंस का खर्च भी घटेगा।
जोखिम और चुनौतियां
फिलहाल यह सिस्टम वॉलंटरी यानी स्वैच्छिक है, इसलिए इसकी व्यापक स्वीकार्यता पर सवाल है। यदि डेवलपर्स को लगा कि यह अतिरिक्त लागत का बोझ है, तो इसे अपनाने की रफ्तार धीमी हो सकती है। निवेशकों को नजर रखनी होगी कि क्या बड़ी कंपनियां इसे अपने प्रोजेक्ट्स में शामिल करती हैं और क्या सरकार आगे चलकर इसे अनिवार्य बनाती है।
