Tamil Nadu Real Estate Regulatory Authority (TNRERA) ने डेवलपर्स के लिए सख्त नियम लागू कर दिए हैं। अब नए लेआउट प्रोजेक्ट्स के रजिस्ट्रेशन के लिए सड़कें और ड्रेनेज जैसी बुनियादी सुविधाएं तैयार करना अनिवार्य होगा।
TNRERA ने अब साफ कर दिया है कि डेवलपर्स को लेआउट रजिस्ट्रेशन से पहले स्टॉर्म-वॉटर ड्रेन्स, सड़क कनेक्टिविटी, स्ट्रीट लाइटिंग और ओपन स्पेस रिजर्वेशन जैसे काम पूरे करने होंगे। यह फैसला खरीदारों की उन शिकायतों के बाद आया है जिनमें डेवलपर्स वादा करने के बाद भी सुविधाएं नहीं दे पाते थे।
आंकड़ों में सख्ती
रेगुलेटर की सख्ती का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस साल आए 5,119 लेआउट आवेदनों में से केवल 3,056 को ही मंजूरी मिली है, यानी अप्रूवल रेट घटकर 60% रह गया है। यह बिल्डिंग-स्पेसिफिक रजिस्ट्रेशन के 74% अप्रूवल रेट से काफी कम है, जो दर्शाता है कि रेगुलेटर अब इंफ्रास्ट्रक्चर पर कोई समझौता नहीं करना चाहता।
मार्केट पर असर
इस नियम के बाद डेवलपर्स पर फाइनेंशियल बोझ बढ़ जाएगा क्योंकि अब उन्हें बिक्री से मिलने वाले पैसों से पहले अपनी पूंजी लगाकर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना होगा। इससे छोटे डेवलपर्स के लिए प्रोजेक्ट पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, जिससे बाजार में सप्लाई कम हो सकती है। DRA Homes के मैनेजिंग डायरेक्टर रंजीत राठौड़ का मानना है कि यह बदलाव इंडस्ट्री को प्रोफेशनल तो बनाएगा, लेकिन इससे प्रोजेक्ट साइकिल लंबी हो सकती है।
निवेशकों को अब डेवलपर्स की वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट और प्रोजेक्ट अप्रूवल की रफ्तार पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है। अगर मंजूरी की प्रक्रिया धीमी रही, तो डेवलपर्स का पैसा प्रोजेक्ट्स में फंस सकता है, जो उनके प्रॉफिट मार्जिन के लिए बड़ा रिस्क है।
