Suraksha Group ने अपने वादे को दोहराते हुए कहा है कि वह Jaypee Infratech के करीब **20,000** अटके हुए घरों को मार्च 2028 तक पूरा कर लेगा। इस प्रोजेक्ट के लिए कंपनी **₹5,500 करोड़** के फंड का इंतजाम टोल रेवेन्यू और इन्वेंट्री बेचकर करेगी।
प्रोजेक्ट की स्थिति और फंडिंग
अगस्त 2026 तक, ग्रुप ने 84 टावरों में 7,913 रेजिडेंशियल यूनिट्स का निर्माण पूरा कर लिया है, जिसमें से 42 टावरों को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) भी मिल चुका है। पूरे प्रोजेक्ट को फिनिश करने के लिए ₹5,500 करोड़ के निवेश की जरूरत है। कंपनी इस फंड को जुटाने के लिए यमुना एक्सप्रेसवे के टोल कलेक्शन और अनसोल्ड इन्वेंट्री की बिक्री पर निर्भर है, ताकि बाहरी कर्ज (debt) पर निर्भरता कम रहे।
निगरानी और ऑपरेशनल चुनौतियां
प्रोजेक्ट पर कड़ा रेगुलेटरी पहरा है। फरवरी 2026 में, NCLT ने दो सदस्यों की एक निगरानी समिति का गठन किया है, जो कंस्ट्रक्शन की गति और घर खरीदारों की शिकायतों पर नजर रखती है। हालांकि, नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) में प्रदूषण के कारण लागू होने वाले NGT के 'स्टॉप-वर्क' आदेश काम की रफ्तार को धीमा कर सकते हैं। इसके अलावा, हजारों तैयार फ्लैट्स के खाली पड़े होने से कंपनी की कैश फ्लो क्षमता पर भी असर पड़ रहा है।
गवर्नेंस और कानूनी पेच
कंपनी का पिछला विवादित इतिहास अभी भी बाधा बना हुआ है। दिल्ली पुलिस द्वारा फंड डायवर्जन के आरोपों की जांच और पुराने मैनेजमेंट से जुड़े मामले निवेशकों के मन में अनिश्चितता पैदा कर रहे हैं। मई 2024 में NCLAT द्वारा स्वीकृत रेजोल्यूशन प्लान के तहत, ग्रुप को किसान कल्याण के लिए मुआवजा पैकेज भी देना है, जो प्रोजेक्ट की लागत और जिम्मेदारियों को और बढ़ाता है।
