एक स्वतंत्र समिति ने अपनी रिपोर्ट में पाया है कि Suraksha Group ने Jaypee Infratech के NCLT-अनुमोदित रेजोल्यूशन प्लान का उल्लंघन किया है। इसमें फंड का गलत इस्तेमाल, कंस्ट्रक्शन में देरी और घटिया सामग्री के इस्तेमाल की पुष्टि हुई है, जिससे हजारों घर खरीदारों की चिंता बढ़ गई है।
क्या है पूरा मामला?
Jaypee Infratech की शिकायतों की जांच कर रही एक स्वतंत्र समिति ने आधिकारिक तौर पर यह माना है कि जून 2024 में कंपनी का नियंत्रण संभालने वाले Suraksha Group ने NCLT द्वारा मंजूर किए गए प्लान की शर्तों को नहीं माना है। समिति की जांच में प्रोजेक्ट में भारी लापरवाही, निर्माण कार्य में लंबी देरी और फंड के अनधिकृत डायवर्जन के सबूत मिले हैं।
फंड डायवर्जन और सुरक्षा पर सवाल
सबसे बड़ा आरोप ₹3,000 करोड़ की क्रेडिट सुविधा न जुटा पाने का है, जिसे रेजोल्यूशन प्लान के तहत 90 दिनों के भीतर पूरा किया जाना था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रोजेक्ट के लिए निर्धारित पैसों को म्यूचुअल फंड्स और सहयोगी संस्थाओं में निवेश कर दिया गया। इसके अलावा, साइट इंस्पेक्शन के दौरान यह भी सामने आया कि प्रीमियम स्टील के बजाय घटिया क्वालिटी का मटेरियल इस्तेमाल किया जा रहा है, जो भूकंपीय जोन (seismic zone) में बनी इन ऊंची इमारतों की मजबूती पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
बढ़ती कानूनी मुसीबतें
Suraksha Group की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हो रही हैं। जनवरी 2026 में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने Suraksha Realty और Lakshdeep Investments के खिलाफ FIR दर्ज की थी, जिसमें ₹230 करोड़ से अधिक के फंड डायवर्जन का आरोप है। यह जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) के संज्ञान में भी है।
फिलहाल Suraksha Group ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है और अपनी कार्यप्रणाली को नियमों के मुताबिक बताया है। हालांकि, समिति ने NCLT से तुरंत सख्त कार्रवाई करने की सिफारिश की है, जिससे अब करीब 17,000 से 20,000 परिवारों की उम्मीदें एक बार फिर अधर में लटक गई हैं।
