Parsvnath Developers को SC का अल्टीमेटम! एक हफ्ते में चुकाएं **12%** ब्याज समेत बकाया, वरना...

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Parsvnath Developers को SC का अल्टीमेटम! एक हफ्ते में चुकाएं **12%** ब्याज समेत बकाया, वरना...

सुप्रीम कोर्ट ने Parsvnath Developers को बड़ा झटका देते हुए एक हफ्ते के अंदर **12%** ब्याज के साथ बकाया भुगतान करने का आदेश दिया है। यह फैसला गुरुग्राम में एक लंबे समय से अटके प्रोजेक्ट से जुड़ा है और कोर्ट का रियल एस्टेट डेवलपर्स के खिलाफ उपभोक्ता अधिकारों को लागू करने का सख्त रुख दिखाता है, भले ही इनसॉल्वेंसी की प्रक्रिया चल रही हो।

Detailed Coverage

एक हफ्ते की मोहलत!

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को Parsvnath Developers को सख्त निर्देश देते हुए घर खरीदारों (homebuyers) का बकाया भुगतान करने के लिए आखिरी एक हफ्ते की मोहलत दी है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि कंपनी को बकाया रकम पर 12% सालाना ब्याज भी देना होगा। यह मामला गुरुग्राम के Parsvnath Exotica प्रोजेक्ट से जुड़ा है, जहाँ खरीदारों को लगभग दो दशकों से अपने प्रॉपर्टी का इंतजार है। इन निवेशकों ने 2014 तक ₹1 करोड़ से ज़्यादा का भुगतान कर दिया था।

कोर्ट का सख्त एक्शन

यह मामला काफी लंबे समय से कोर्ट में चल रहा था। इससे पहले, हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (HRERA) ने प्रोजेक्ट में देरी के लिए कंपनी को 9.3% सालाना ब्याज देने का निर्देश दिया था। इस पर अमल न होने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा। कोर्ट ने कंपनी के निदेशकों के पर्सनल बैंक अकाउंट फ्रीज कर दिए हैं और गैर-जमानती वारंट (non-bailable warrants) भी जारी किए हैं। इससे यह साफ हो गया है कि अब कंपनी के प्रमोटर्स को कॉर्पोरेट डिफॉल्ट के लिए व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह ठहराया जाएगा।

खरीदारों को न्याय और इनसॉल्वेंसी पर असर

संविधान के आर्टिकल 142 के तहत अपने विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने प्रभावित घर खरीदारों को पूरा न्याय दिलाने की कोशिश की है। कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि इनसॉल्वेंसी (insolvency) की प्रक्रिया को पिछले न्यायिक आदेशों द्वारा अनिवार्य किए गए भुगतानों को अनिश्चित काल तक रोकने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट, 2016 के तहत, घर खरीदारों को प्रोजेक्ट में भारी देरी होने पर ब्याज सहित रिफंड पाने का हक है।

रियल एस्टेट सेक्टर के लिए बड़ा संदेश

कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला उन डेवलपर्स के लिए एक चेतावनी है जो अक्सर प्रोजेक्ट पूरा करने में देरी करते हैं। प्रमोटर्स की व्यक्तिगत संपत्ति पर कार्रवाई करने की कोर्ट की मंशा रियल एस्टेट सेक्टर में एक सख्त रवैया दिखाती है। डेवलपर्स पर अब प्रोजेक्ट की टाइमलाइन और रेगुलेटरी नियमों का सख्ती से पालन करने का दबाव बढ़ गया है। अब यह देखना बाकी है कि Parsvnath Developers एक हफ्ते की समय सीमा में जरूरी फंड जुटा पाता है या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.