सुप्रीम कोर्ट ने Parsvnath Developers के सेटलमेंट प्रस्ताव को खारिज करते हुए इसे देरी करने की चाल बताया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अगर कंपनी ने कोई ठोस प्लान पेश नहीं किया, तो प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए एक हाई-पावर्ड कमेटी का गठन किया जाएगा। कंपनी अप्रैल **2026** से ही इंसॉल्वेंसी प्रोसेस (CIRP) से गुजर रही है।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सुनवाई के दौरान नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि कंपनी का प्रस्ताव केवल कानूनी कार्यवाही को टालने का एक तरीका है, न कि घर खरीदारों की समस्याओं का समाधान। कुछ खरीदार तो 2 दशक से अपने घर का इंतज़ार कर रहे हैं, जिसे देखते हुए कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
बैंक अकाउंट्स अनफ्रीज करने से इनकार
अदालत ने इंसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (IRP) की उस अपील को भी ठुकरा दिया, जिसमें कंपनी के बैंक अकाउंट्स को अनफ्रीज करने की मांग की गई थी। फिलहाल, कंपनी का मैनेजमेंट IRP मनोज कुमार आनंद के अधीन है।
कंपनी की फाइनेंशियल हालत
कंपनी पर भारी कर्ज है और शेयरहोल्डर इक्विटी नेगेटिव बनी हुई है। बैंक अकाउंट्स फ्रीज होने और इंसॉल्वेंसी की कार्यवाही के कारण कंपनी के पास प्रोजेक्ट पूरे करने के लिए फंड्स की भारी किल्लत है। भविष्य में कोर्ट की अगली सुनवाई ही तय करेगी कि मौजूदा मैनेजमेंट के पास कंट्रोल रहेगा या फिर कोर्ट द्वारा गठित कमेटी कमान अपने हाथों में लेगी।
