सुप्रीम कोर्ट का CBI पर दबाव, रियल एस्टेट जांच की टाइमलाइन माँगी
सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को NCR में चल रहे रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स की जांच के लिए एक स्पष्ट टाइमलाइन (समय-सीमा) देने के लिए कहा है। इसमें Supertech Ltd. के प्रोजेक्ट्स भी शामिल हैं। चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने खरीदारों की 'निरंतर पीड़ा' का जिक्र किया और कहा कि जांच जल्द से जल्द पूरी होनी चाहिए, क्योंकि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। यह मामला अप्रैल के सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद आया है, जिसमें बैंकों और बिल्डरों की मिलीभगत की प्रारंभिक जांच का आदेश दिया गया था। CBI ने जुलाई में Supertech और अन्य के खिलाफ FIR दर्ज करनी शुरू की थी।
सबवेंशन स्कीम्स: खरीदारों पर शिफ्ट हुआ करोड़ों का रिस्क
CBI की जांच ₹5,157.86 करोड़ से अधिक के सबवेंशन स्कीम्स (Subvention Schemes) पर केंद्रित है, जिनका वितरण 1998 से किया गया है। इस स्कीम के तहत, डेवलपर प्रोजेक्ट हैंडओवर होने तक खरीदारों की EMI भरते हैं। लेकिन, डेवलपर्स के डिफॉल्ट (भुगतान न करने) के कारण अब बैंक और फाइनेंस कंपनियां सीधे खरीदारों से संपर्क कर रही हैं, भले ही प्रोजेक्ट अधूरे हों। इससे सारा फाइनेंशियल रिस्क (वित्तीय जोखिम) खरीदारों पर आ गया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, Supertech 6 शहरों में 21 से अधिक प्रोजेक्ट्स में शामिल रही है, जिसमें 19 वित्तीय संस्थान और करीब 800 खरीदार फंसे हुए हैं।
प्रोजेक्ट अप्रूवल में रेगुलेटरी खामियों पर भी उठे सवाल
सुप्रीम कोर्ट सरकारी निकायों जैसे New Okhla Industrial Development Authority (NOIDA), Greater Noida Industrial Development Authority (GNIDA) और Yamuna Expressway Industrial Development Authority (YEIDA) से भी जांच कराने की मांग कर रहा है। रिपोर्ट्स में लैंड अलॉटमेंट (भूमि आवंटन), प्रोजेक्ट अप्रूवल (परियोजना मंजूरी) और इन अथॉरिटीज की निगरानी में प्रणालीगत समस्याओं (systemic issues) का जिक्र किया गया है। आलोचकों का कहना है कि इन लापरवाहियों के चलते डेवलपर्स पर्याप्त फंड या व्यवहार्यता जांच के बिना प्रोजेक्ट शुरू कर पाते हैं। CBI इन अथॉरिटीज की जांच यह पता लगाने के लिए कर रही है कि कहीं इनकी मिलीभगत या लापरवाही तो इस संकट का कारण नहीं बनी।
Supertech का वित्तीय संकट और रियल एस्टेट का बड़ा सच
Supertech Group खुद गंभीर वित्तीय संकट (financial distress) और इंसॉल्वेंसी प्रोसीडिंग्स (दिवालियापन की कार्यवाही) से जूझ रहा है। कंपनी का विवादों से पुराना नाता रहा है, जिसमें ख़त्म हो चुके प्रोजेक्ट्स में स्ट्रक्चरल डिफेक्ट्स (ढांचागत खामियां) और बिल्डिंग कोड के उल्लंघन के कारण नोएडा के ट्विन टावर को गिराना भी शामिल है। सुपरटेक पर भारी कर्ज (highly leveraged) है, जो इसे मार्केट के उतार-चढ़ाव और डिफॉल्ट के प्रति कमजोर बनाता है। NCR रियल एस्टेट का यह संकट, जहां कई डेवलपर्स प्रोजेक्ट्स और कर्ज से जूझ रहे हैं, एक बड़ी प्रणालीगत समस्या को दर्शाता है। इससे खरीदारों को लंबा इंतजार करना पड़ता है और फाइनेंशियल संस्थानों के लिए भी जोखिम बढ़ता है।
आगे क्या? खरीदारों और सेक्टर के लिए उम्मीद या अनिश्चितता?
सुप्रीम कोर्ट द्वारा टाइमलाइन मांगे जाने के बाद, CBI की जांच Supertech और संभवतः अन्य संबंधित पक्षों, जिनमें वित्तीय संस्थान भी शामिल हैं, के लिए बड़ी चुनौतियां पेश करती है। खरीदारों का समाधान जांच की गति और प्रभावशीलता पर निर्भर करेगा। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि लंबी कानूनी अनिश्चितता रियल एस्टेट में निवेशक के भरोसे को कम कर सकती है, खासकर अत्यधिक कर्ज वाले डेवलपर्स या मुश्किल इलाकों में। इस जांच का नतीजा भविष्य में रियल एस्टेट फाइनेंस और डेवलपर जवाबदेही के लिए नियमों को आकार दे सकता है।