कोर्ट का बड़ा फैसला और प्रोजेक्ट को दोबारा शुरू करने की योजना
सुप्रीम कोर्ट का यह अहम फैसला नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) द्वारा Alpha Corp की योजना को खारिज करने के फैसले के उलट है। कोर्ट ने साफ किया कि Insolvency and Bankruptcy Code (IBC) के तहत इस पुनरुद्धार योजना (revival plan) को आगे बढ़ाया जाएगा। कोर्ट ने आगाह किया कि इसमें और देरी होने से घर खरीदारों और 'Earth TechOne', 'Earth Sapphire Court', और 'Earth Copia' जैसे प्रोजेक्ट्स में निवेश करने वाले कमर्शियल-स्पेस खरीदारों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
Alpha Corp ने यह भी वादा किया है कि वह बकाया ड्यूज़ को अगले 24 महीनों में चुकाएगी, और खास बात यह है कि खरीदारों पर इसका कोई भी वित्तीय बोझ नहीं डाला जाएगा। इससे पहले, नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने भी Alpha Corp की योजना को मंजूरी दी थी, जिससे 2011 से अटके इन प्रोजेक्ट्स को पूरा करने और खरीदारों को सौंपने का रास्ता साफ हो गया है।
अथॉरिटी की भूमिका और निवेश का ब्योरा
सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (GNIDA) को निर्देश दिया है कि वह केवल अपना प्रिंसिपल ड्यूज़ ही वसूले, जबकि सभी तरह के पेनल्टी इंटरेस्ट और अतिरिक्त चार्ज माफ कर दिए जाएं। कोर्ट ने अथॉरिटी की भूमिका को भी समझा, जिसने प्रोजेक्ट में देरी में योगदान दिया था। Alpha Corp इन प्रोजेक्ट्स को पूरा करने, उनका रीडेवलपमेंट करने, इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने और उन्हें डिलीवर करने के लिए लगभग ₹750 करोड़ का निवेश करने का इरादा रखती है। कंपनी को इन प्रोजेक्ट्स से करीब ₹1,200 करोड़ के रेवेन्यू की उम्मीद है।
रियल एस्टेट सेक्टर पर व्यापक असर
यह फैसला, Insolvency Resolution Framework को एक मजबूत समर्थन माना जा रहा है और नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) में अटके हुए रियल एस्टेट एसेट्स को सुलझाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि इन कमर्शियल प्रोजेक्ट्स में 60% स्पेस और रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट में 450 यूनिट्स पहले ही बिक चुकी हैं, लेकिन कई खरीदार सालों से अपने होम लोन की EMI भर रहे थे, लेकिन उन्हें अभी तक पज़ेशन नहीं मिला था। इस पुनरुद्धार से लंबी अनिश्चितता के बाद खरीदारों को एक उम्मीद की किरण नजर आई है।
