रियल एस्टेट डेवलपर Sunteck Realty ने वित्तीय वर्ष 2027 की पहली तिमाही (1QFY27) में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए **20%** की सालाना वृद्धि के साथ **₹790 करोड़** की प्री-सेल्स दर्ज की है। कंपनी के प्रीमियम लक्जरी हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की मजबूत मांग इस ग्रोथ की मुख्य वजह रही।
Detailed Coverage
लक्जरी सेगमेंट में बंपर डिमांड
Sunteck Realty के नतीजों के अनुसार, इस तिमाही में ₹790 करोड़ की प्री-सेल्स हासिल हुई, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 20% ज्यादा है। कंपनी के लिए सबसे अच्छी बात यह रही कि उनके प्रीमियम लक्जरी प्रोजेक्ट्स ने अकेले आधे से ज्यादा यानी 50% बिक्री में योगदान दिया। वहीं, कंपनी के उबर-लक्जरी और एस्पिरेशनल लक्जरी सेगमेंट ने भी बिक्री बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई, जो खरीदारों के बीच हाई-वैल्यू वाले रेजिडेंशियल प्रॉपर्टीज की बढ़ती पसंद को दर्शाता है।
₹7,100 करोड़ की लॉन्च पाइपलाइन तैयार
कंपनी अब लगभग ₹7,100 करोड़ की मूल्य वाली नई परियोजनाओं को लॉन्च करने की तैयारी में है। इन प्रोजेक्ट्स में मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) के प्रमुख इलाके जैसे अंधेरी और मीरा रोड शामिल हैं। इसके अलावा, कंपनी ODC, वसई और नायगांव में भी नए टावर विकसित कर रही है। मैनेजमेंट का अनुमान है कि पूरे वित्तीय वर्ष के लिए प्री-सेल्स में 25% से 30% तक की ग्रोथ देखने को मिल सकती है। खास बात यह है कि कंपनी दुबई में भी एक प्रोजेक्ट लॉन्च करने की योजना बना रही है, जिसे निवेशक महत्वपूर्ण मान रहे हैं क्योंकि यह फिलहाल ज्यादातर ग्रोथ अनुमानों में शामिल नहीं है।
नेट एसेट वैल्यू (NAV) से डिस्काउंट पर शेयर
आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 से 2028 के बीच प्री-सेल्स में 25% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़कर ₹4,900 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है। फिलहाल, Sunteck Realty का शेयर अपनी नेट एसेट वैल्यू (NAV) के मुकाबले डिस्काउंट पर ट्रेड कर रहा है। NAV कंपनी की कुल संपत्ति में से देनदारियों को घटाकर निकाली जाती है। शेयर की कीमत और उसकी असल संपत्ति मूल्य के बीच का यह अंतर अक्सर विश्लेषकों द्वारा मार्केट सेंटिमेंट को आंकने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
रियल एस्टेट सेक्टर के जोखिम
भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव, रेगुलेटरी बदलावों और स्थानीय मांग के चक्रों के प्रति काफी संवेदनशील होता है। Sunteck Realty अपनी पोर्टफोलियो का विस्तार तो कर रही है, लेकिन बड़े पैमाने पर डेवलपमेंट से जुड़े जोखिमों, जैसे प्रोजेक्ट में देरी या लागत में वृद्धि, को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ये कारक कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव डाल सकते हैं। ऐसे में, निवेशकों को कंपनी की आगामी प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने और प्रतिस्पर्धी बाजार में बिक्री की वर्तमान गति बनाए रखने की क्षमता पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए।
