Southern Real Estate: लग्जरी की दौड़ में बड़े हो रहे घर, Q2 2026 में 72% लॉन्च 3BHK के

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Southern Real Estate: लग्जरी की दौड़ में बड़े हो रहे घर, Q2 2026 में 72% लॉन्च 3BHK के

बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद के रियल एस्टेट मार्केट में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। Q2 2026 के नए लॉन्च में **72%** हिस्सेदारी बड़े साइज वाले 3BHK घरों की रही है। हालांकि यह कदम डेवलपर्स के मुनाफे को बचा रहा है, लेकिन अफोर्डेबल हाउसिंग की कमी निवेशकों के लिए एक रिस्क फैक्टर बन सकती है।

दक्षिण भारतीय शहरों में रियल एस्टेट डेवलपर्स ने अब छोटे और सस्ते घरों से ध्यान हटाकर बड़े साइज वाले घरों पर शिफ्ट होना शुरू कर दिया है। बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद जैसे प्रमुख शहरों में Q2 2026 के दौरान आए नए प्रोजेक्ट्स में से 72% हिस्सेदारी केवल 3BHK या उससे बड़े घरों की थी। इस रणनीति ने मार्केट में सप्लाई असंतुलन पैदा कर दिया है, क्योंकि 1BHK और 2BHK घरों की मांग के बावजूद सप्लाई बहुत कम है।

मुनाफे को बचाने की कवायद

इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण मार्जिन को सुरक्षित करना है। जमीन की बढ़ती कीमतों और स्टील-सीमेंट जैसे कंस्ट्रक्शन मटेरियल की लागत ने डेवलपर्स पर दबाव डाल रखा है। छोटे घर बनाने में मार्जिन कम होता है क्योंकि किचन और बाथरूम जैसी बुनियादी लागत साइज के हिसाब से बहुत ज्यादा कम नहीं होती। इसीलिए, प्रीमियम और बड़े घरों पर शिफ्ट होकर कंपनियां ऊंचे टिकट प्राइस हासिल कर रही हैं, ताकि बढ़ती लागत की भरपाई हो सके।

उदाहरण के लिए, Shriram Properties ने अपने प्रोजेक्ट मिक्स में 65% हिस्सेदारी 3BHK यूनिट्स की कर दी है, जो इस व्यापक ट्रेंड को दर्शाता है।

अफोर्डेबिलिटी का गैप बढ़ा

यह ट्रेंड आम खरीदारों की जेब पर भारी पड़ रहा है। बेंगलुरु में प्रॉपर्टी की कीमतें 2019 के बाद से 84% तक बढ़ गई हैं, जबकि लोगों की कमाई में केवल 72% का ही इजाफा हुआ है। हैदराबाद में स्थिति और गंभीर है, जहां 1BHK और 2BHK की नई सप्लाई महज 5.2% रह गई है।

निवेशकों के लिए चेतावनी

हालांकि यह रणनीति शॉर्ट टर्म में मुनाफा तो दे रही है, लेकिन निवेशकों को कुछ रिस्क पर नजर रखनी चाहिए:

  • इन्वेंट्री का खतरा: अगर प्रीमियम घरों की मांग में नरमी आई, तो बड़े साइज के घरों का स्टॉक अनसोल्ड रह सकता है।
  • IT सेक्टर पर निर्भरता: इन शहरों का रियल एस्टेट काफी हद तक टेक सेक्टर की हायरिंग और इनकम ग्रोथ पर निर्भर है। यदि वहां सुस्ती आती है, तो इन हाई-वैल्यू प्रोजेक्ट्स पर दबाव बढ़ेगा।

छोटे और कमजोर बैलेंस शीट वाले डेवलपर्स के लिए यह स्थिति ज्यादा चुनौतीपूर्ण है। निवेशकों को आने वाले समय में इन्वेंट्री एब्जॉर्प्शन की रफ्तार और कीमतों पर डेवलपर्स की पकड़ को ध्यान से मॉनिटर करना चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.