भारत के लिस्टेड ऑफिस REIT मार्केट में दक्षिण भारत के शहरों का बोलबाला है। बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई में कुल **103.5 मिलियन स्क्वायर फीट** ऑफिस स्पेस है, जो देश के कुल REIT स्पेस का **62%** हिस्सा है।
भारत का कमर्शियल रियल एस्टेट मार्केट अब एक बड़े बदलाव से गुजर रहा है। Assocham और Knight Frank की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 8 प्रमुख शहरों में लिस्टेड REITs के पास कुल 167 मिलियन स्क्वायर फीट ऑफिस स्पेस है। इसमें से 103.5 मिलियन स्क्वायर फीट अकेले दक्षिण भारत के शहरों (बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई) में स्थित है।
इस ग्रोथ की वजह क्या है?
इस तेजी के पीछे सबसे बड़ी ताकत ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) और टेक कंपनियों की निरंतर मांग है। इन्हें हाई-क्वालिटी 'ग्रेड ए' ऑफिस स्पेस की जरूरत होती है। इस मार्केट में Embassy Office Parks, Mindspace Business Parks, Brookfield India Real Estate Trust, Knowledge Realty Trust और Bagmane Prime Office REIT जैसे बड़े खिलाड़ी हावी हैं। खास तौर पर बेंगलुरु में, कुल ऑफिस इन्वेंट्री का 27% हिस्सा अब REITs के पास है।
निवेशकों के लिए रिस्क और सावधानियां
निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि REITs का इतना ज्यादा एक ही क्षेत्र (साउथ इंडिया) पर निर्भर होना एक तरह का रिस्क भी पैदा करता है। यदि टेक सेक्टर की हायरिंग में सुस्ती आती है या ऑफिस डिमांड गिरती है, तो इसका सीधा असर रेंटल इनकम पर पड़ेगा। मार्च 2026 तक इन ट्रस्टों का लोन-टू-वैल्यू रेशियो 24% रहा है, जो बताता है कि इन्होंने कर्ज को बेहतर मैनेज किया है, लेकिन ब्याज दरों में बदलाव सीधे इनके मुनाफे पर चोट कर सकता है।
आगे चलकर REITs की परफॉरमेंस इस बात पर निर्भर करेगी कि वे कितनी कुशलता से ऑक्यूपेंसी लेवल को बनाए रखती हैं और लीज रिन्यूअल को कैसे हैंडल करती हैं।
