नतीजों का पूरा पोस्टमॉर्टम: रेवेन्यू गिरा, नुकसान बढ़ा!
Signatureglobal (India) Limited ने 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त हुई तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के अपने वित्तीय नतीजे जारी किए हैं, जो कंपनी के लिए चिंता का सबब हैं। कंपनी के प्रदर्शन में भारी गिरावट देखी गई है।
कंसोलिडेटेड फ्रंट पर:
- कंपनी का रेवेन्यू पिछले साल की तीसरी तिमाही के ₹8,276.85 मिलियन के मुकाबले गिरकर ₹2,844.38 मिलियन पर आ गया, यानी 66% की भारी गिरावट। तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) भी रेवेन्यू 16% घटकर ₹3,384.92 मिलियन रहा।
- सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि कंपनी ₹453.38 मिलियन के नेट लॉस (Net Loss) में चली गई है, जबकि पिछले साल की इसी तिमाही में ₹291.35 मिलियन का प्रॉफिट (Profit) था।
- पहले नौ महीनों (Nine-month period) के नतीजे भी चिंताजनक हैं, जिसमें ₹577.64 मिलियन का नेट लॉस हुआ, जबकि पिछले साल इसी अवधि में ₹400.83 मिलियन का प्रॉफिट था।
स्टैंडअलोन परफॉर्मेंस भी कमजोर:
- स्टैंडअलोन रेवेन्यू में भी 55% की गिरावट आई और यह ₹2,992.24 मिलियन पर आ गया। हालांकि, तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) इसमें 16% का इजाफा हुआ, जो ₹2,587.86 मिलियन था।
- स्टैंडअलोन नेट लॉस ₹134.82 मिलियन रहा, जबकि Q3 FY25 में ₹277.73 मिलियन का प्रॉफिट दर्ज किया गया था।
- पहले नौ महीनों में भी ₹268.75 मिलियन का स्टैंडअलोन लॉस हुआ, जबकि पिछले साल ₹103.74 मिलियन का प्रॉफिट था।
मार्जिन्स और डेट का बोझ:
- कंपनी के मार्जिन्स (Margins) बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। कंसोलिडेटेड ऑपरेटिंग मार्जिन -22.23% पर पहुंच गए, जो पिछले साल 1.63% थे। नेट प्रॉफिट मार्जिन भी -15.94% पर आ गए (पिछले साल 3.52% थे)।
- स्टैंडअलोन ऑपरेटिंग मार्जिन -2.36% रहे (पिछले साल 5.35% थे) और नेट प्रॉफिट मार्जिन -4.51% (पिछले साल 4.22% थे)।
- डेट (Debt) की स्थिति भी बिगड़ती दिख रही है। कंसोलिडेटेड डेट इक्विटी रेशियो (Debt Equity Ratio) बढ़कर 4.53 हो गया है (पहले 3.66 था)।
- डेट सर्विस कवरेज रेशियो (DSCR) -0.05 और इंटरेस्ट सर्विस कवरेज रेशियो (ISCR) -2.07 पर हैं, जो कर्ज चुकाने में गंभीर कठिनाइयों का संकेत देते हैं। स्टैंडअलोन ISCR भी 0.88 पर है, जो सामान्य से कम है।
कंपनी की तरफ से:
कंपनी ने बताया है कि उसने ₹8,750 मिलियन के NCD (Non-Convertible Debenture) इश्यू का पूरा इस्तेमाल कर लिया है, जो ₹36,764 मिलियन की प्रोजेक्ट लैंड के मुकाबले सुरक्षित था। दिल्ली-एनसीआर में एक प्रॉपर्टी की बिक्री भी पूरी हो गई है।
यह ध्यान देने वाली बात है कि कंपनी की ओर से भविष्य के लिए कोई स्पष्ट गाइडेंस (Management Guidance) या आउटलुक (Outlook) जारी नहीं किया गया है। मार्जिन में भारी कमी, नुकसान में आना और कर्ज चुकाने में दिक्कतें निवेशकों के लिए बड़े रेड फ्लैग्स (Red flags) हैं जिन पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है।