Shriram Properties ने आखिरकार पश्चिम बंगाल सरकार के साथ एक दशक पुराने ज़मीन विवाद को सुलझा लिया है। यह डील कंपनी के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है, क्योंकि इससे ₹240 करोड़ की बड़ी देनदारी खत्म हो गई है और Kolkata के पास 314 एकड़ ज़मीन पर बन रहे महत्वाकांक्षी उत्तरपारा टाउनशिप प्रोजेक्ट के काम में तेजी आएगी। इस समझौते के तहत Shriram Properties को राज्य सरकार को 42.37 एकड़ ज़मीन सौंपनी होगी।
विवाद सुलझने का असर: ₹240 करोड़ की देनदारी खत्म, प्रोजेक्ट को मिली रफ्तार
यह विवाद करीब दस साल पुराना था, जब Shriram Properties ने 2007 में Hindustan Motors से 314 एकड़ ज़मीन खरीदी थी। हालांकि, राज्य सरकार की ओर से रेवेन्यू शेयरिंग के दावे को लेकर Shriram Properties और सरकार के बीच लंबे समय से कानूनी और व्यावसायिक मतभेद चल रहे थे। इस विवाद के सुलझने से न सिर्फ कंपनी ₹240 करोड़ की देनदारी से मुक्त हो गई है, बल्कि बची हुई ज़मीन का पूरा फायदा उठाने का रास्ता भी साफ हो गया है। कंपनी के CEO गोपालकृष्णन जे (Gopalakrishnan J) ने कहा कि इस सेटलमेंट से 'विकास को तेजी से आगे बढ़ाने की हमारी क्षमता बढ़ी है' और हम 'महत्वपूर्ण वैल्यू को तेजी से अनलॉक कर पाएंगे।' कंपनी, जिसने पहले ही 50 लाख वर्ग फुट रेजिडेंशियल स्पेस विकसित कर लिया है, अब अपनी 50-60 एकड़ अतिरिक्त ज़मीन पर 50-60 लाख वर्ग फुट और निर्माण करने की योजना बना रही है। बची हुई ज़मीन को मोनेटाइज (Monetize) भी किया जाएगा। यह कदम एक लंबे समय से चले आ रहे मुद्दे को खत्म करता है जिसने कंपनी के रणनीतिक फैसलों और ग्रोथ की संभावनाओं को प्रभावित किया था।
सेक्टर का हाल और कंपनी की स्थिति
Shriram Properties भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में काम करती है, जो आजकल काफी तेजी से बढ़ रहा है। बड़े घरों और लग्जरी सेगमेंट में मांग बढ़ी है। सरकारी नीतियां भी बड़े प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा दे रही हैं। उत्तरपारा प्रोजेक्ट, इंटीग्रेटेड टाउनशिप डेवलपमेंट के बढ़ते चलन के अनुरूप है, जिसमें रेजिडेंशियल, कमर्शियल और मनोरंजक सुविधाएं शामिल होती हैं।
हालांकि, Shriram Properties, जिसका मार्केट कैप करीब ₹1,400 करोड़ है, DLF (मार्केट कैप ₹2.06 लाख करोड़) या Godrej Properties (मार्केट कैप ₹90,674 करोड़) जैसे बड़े नेशनल डेवलपर्स की तुलना में काफी छोटी है। Shriram Properties की वैल्यूएशन (P/E रेश्यो 15-22 के बीच) भले ही कम लगे, लेकिन यह साउथ इंडिया और कोलकाता में मिड-मार्केट और अफोर्डेबल हाउसिंग पर फोकस को दर्शाता है। कंपनी की मौजूदा शेयर प्राइस (₹80-₹83 के आसपास) 52-हफ्ते की रेंज ₹63.13 से ₹105.58 के बीच है।
पहले Hiranandani Group (IT पार्क के लिए) और Logos Group (लॉजिस्टिक्स फैसिलिटी के लिए) के साथ हुई चर्चाएं इसी ज़मीन विवाद के कारण रुकी हुई थीं। अब इन पार्टनरशिप को फिर से शुरू करने की संभावना है।
क्या हैं चिंताएं? (Bear Case)
इस समाधान के बावजूद, Shriram Properties को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। पिछले 10 सालों का फाइनेंशियल रिकॉर्ड बताता है कि कंपनी की ग्रोथ औसत से कम रही है। FY23 तक के 3 सालों में, कंपनी ने खराब प्रॉफिट ग्रोथ (-17.66%) और रेवेन्यू में गिरावट (-32.47%) दर्ज की। Key financial ratios जैसे Return on Equity (ROE) और Return on Capital Employed (ROCE) भी काफी कम रहे हैं, ROE 1.93% और ROCE 3.46% रहा है।
कंपनी पर ₹732 करोड़ की कंटीजेंट लायबिलिटीज़ (Contingent Liabilities) भी हैं और ऑपरेटिंग एक्टिविटी से कैश फ्लो नेगेटिव रहा है। हाल ही में Q2FY26 में, Shriram Properties ने रेवेन्यू में 48% की सालाना बढ़ोतरी के बावजूद ₹8.67 करोड़ का नेट लॉस दर्ज किया। यह लॉस बेंगलुरु में रेगुलेटरी बदलावों और ई-खता (eKhata) प्रोसेस की देरी के कारण रेवेन्यू रिकग्निशन में रुकावट की वजह से हुआ।
इसके अलावा, अक्टूबर 2023 में कंपनी के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) की तलाशी भी एक अनिश्चितता का माहौल बनाती है, हालांकि कंपनी को अभी तक कोई औपचारिक निष्कर्ष नहीं बताया गया है। प्रमोटर्स की 27.9% की कम होल्डिंग भी लंबी अवधि की प्रतिबद्धता और रणनीतिक दिशा पर सवाल खड़े करती है।
आगे का रास्ता
उत्तरपारा ज़मीन विवाद के सुलझने से Shriram Properties अब अपने डेवलपमेंट और मोनेटाइजेशन प्लान्स को बेहतर ढंग से लागू करने की स्थिति में है। भारतीय रियल एस्टेट मार्केट की सामान्य तेजी और सरकारी समर्थन अनुकूल माहौल प्रदान करते हैं। हालांकि, कंपनी की ऐतिहासिक चुनौतियों को पार करने और अपने ऑपरेशनल और फाइनेंशियल मैट्रिक्स को बेहतर बनाने की क्षमता ही यह तय करेगी कि वह इस अवसर को लगातार मुनाफे में कैसे बदल पाती है।
विश्लेषकों का नजरिया मिला-जुला है। जून 2025 की एक रिपोर्ट में अंडरवैल्यूएशन और 12 महीने के टारगेट प्राइस ₹100-₹120 के आधार पर 'Buy' रेटिंग की सिफारिश की गई थी, लेकिन इसमें एक्जीक्यूशन रिस्क को भी माना गया था। 14 फरवरी, 2026 को होने वाली बोर्ड मीटिंग, जिसमें Q3FY26 के फाइनेंशियल रिजल्ट्स को मंजूरी दी जाएगी, सेटलमेंट के बाद कंपनी के तत्काल प्रदर्शन की और जानकारी देगी।