जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण Shriram Properties की कंस्ट्रक्शन लागत में **8-10%** का इजाफा हुआ है। कंपनी ग्राहकों पर बोझ डालने के बजाय खुद इस लागत को झेल रही है, जिससे निवेशकों की नजर अब आगामी नतीजों पर टिकी है।
बढ़ती लागत और मैनेजमेंट की रणनीति
ग्लोबल जियोपॉलिटिकल हालातों के चलते सप्लाई चेन बाधित हुई है, जिसका सीधा असर कंस्ट्रक्शन के सामानों पर पड़ रहा है। एलिवेटर्स, टाइल्स और सैनिटरी फिटिंग्स जैसी चीजों की कीमतें बढ़ गई हैं। हालांकि स्टील और सीमेंट के दाम अभी स्थिर हैं, लेकिन अन्य खर्चों ने कंपनी के मुनाफे पर दबाव बना दिया है। कंपनी ने फैसला किया है कि वह फिलहाल इस बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों पर नहीं डालेगी ताकि सेल्स वॉल्यूम प्रभावित न हो। लागत को कंट्रोल करने के लिए अब कंपनी चीन से इंपोर्ट बढ़ाने पर विचार कर रही है।
भविष्य की योजनाएं और लक्ष्य
चुनौतियों के बावजूद, कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए ₹2,200 करोड़ का रेवेन्यू टारगेट तय किया है। कंपनी का फोकस मुख्य रूप से चेन्नई के रेजिडेंशियल मार्केट पर है। वहीं, कमर्शियल रियल एस्टेट को लेकर कंपनी सतर्क है और इसे अपने कुल पोर्टफोलियो का सिर्फ 10% तक सीमित रखा है।
निवेशकों के लिए जरूरी अपडेट
फिलहाल शेयर ₹67 से ₹69 के दायरे में ट्रेड कर रहा है। कंपनी का ट्रेडिंग विंडो 1 अक्टूबर, 2026 से बंद है, जो कि सेकंड क्वार्टर के नतीजों के ऐलान के 48 घंटे बाद तक खुला रहेगा। निवेशकों को कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन और कॉस्ट मैनेजमेंट पर बारीक नजर रखने की जरूरत है। इसके अलावा, अक्टूबर 2024 में हुई प्रवर्तन निदेशालय (ED) की सर्च का मुद्दा भी कंपनी की रेगुलेटरी हिस्ट्री का हिस्सा बना हुआ है, जिस पर एनालिस्ट्स की नजर रहती है।
