Shriram Properties ने कंस्ट्रक्शन में आ रही लेबर की भारी कमी से निपटने के लिए नई टेक्नोलॉजी का सहारा लिया है। अब कंपनी पेंटिंग और टाइलिंग के लिए रोबोटिक मशीनों का इस्तेमाल करेगी, ताकि **34 मिलियन स्क्वायर फीट** के पाइपलाइन प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा किया जा सके।
रोबोटिक्स से बदलेगी रफ्तार
खासतौर पर उत्तर भारत में स्किल्ड लेबर की भारी किल्लत के चलते कंस्ट्रक्शन का काम प्रभावित हो रहा था। इसे देखते हुए Shriram Properties ने स्वदेशी रोबोटिक सॉल्यूशंस को अपने प्रोजेक्ट्स में शामिल किया है। कंपनी के पास अभी 41 प्रोजेक्ट्स पाइपलाइन में हैं, जो 34 मिलियन स्क्वायर फीट में फैले हैं। ऑटोमेशन के जरिए कंपनी न केवल काम की रफ्तार बढ़ाना चाहती है, बल्कि फिनिशिंग क्वालिटी को भी बेहतर बनाना चाहती है।
लागत और मार्जिन का दबाव
हालांकि रोबोटिक्स का इस्तेमाल एक बड़ा बदलाव है, लेकिन इसके लिए भारी इनिशियल कैपिटल खर्च की जरूरत पड़ती है। कंपनी मैनेजमेंट का कहना है कि उनकी ऑपरेशंस की स्केल इतनी बड़ी है कि वे इन खर्चों को कई साइट्स पर बांट सकते हैं, जो छोटी कंपनियों के मुकाबले उन्हें बढ़त दिलाएगा।
वित्तीय मोर्चे पर बात करें, तो फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में कंपनी ने ₹271 करोड़ का रेवेन्यू और ₹484 करोड़ की रिकॉर्ड सेल्स दर्ज की है। लेकिन, पूरी रियल एस्टेट इंडस्ट्री की तरह, इन्हें भी कंस्ट्रक्शन कॉस्ट में 8-10% की बढ़ोतरी का सामना करना पड़ रहा है। कच्चे माल और सप्लाई चेन की अस्थिरता से प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बना हुआ है। फिलहाल शेयर ₹65 से ₹70 के दायरे में ट्रेड कर रहा है।
डेट और भविष्य की राह
जून 2026 तक कंपनी का नेट डेट-टू-इक्विटी रेशियो 0.29x पर है। मैनेजमेंट ने संकेत दिए हैं कि आक्रामक ग्रोथ और पाइपलाइन डेवलपमेंट के लिए इस फाइनेंशियल ईयर में कर्ज थोड़ा बढ़ सकता है। निवेशकों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या रोबोटिक्स के इस्तेमाल से वाकई लॉन्ग-टर्म में लेबर कॉस्ट कम होती है और क्या कंपनी बढ़ती लागतों का बोझ मार्जिन को नुकसान पहुंचाए बिना ग्राहकों पर डाल पाती है या नहीं।
