SeasonTwo Living और RPS Group की बड़ी साझेदारी, ₹1,500 करोड़ में बनाएंगे सीनियर लिविंग होम

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
SeasonTwo Living और RPS Group की बड़ी साझेदारी, ₹1,500 करोड़ में बनाएंगे सीनियर लिविंग होम

सीनियर सिटीजन्स के लिए एक बड़े प्रोजेक्ट का ऐलान हुआ है। SeasonTwo Living और RPS Group मिलकर भारत के 10 शहरों में **2,000** रेजिडेंशियल यूनिट्स तैयार करेंगे। **₹1,500 करोड़** का यह प्रोजेक्ट बुजुर्गों की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए डिजाइन किया गया है।

भारत के रियल एस्टेट सेक्टर में अब सर्विस-ओरिएंटेड मॉडल्स का दौर आ गया है। SeasonTwo Living और RPS Group की यह साझेदारी इसी दिशा में एक बड़ा कदम है। फिलहाल, इस प्रोजेक्ट का काम गोवा, दिल्ली और वाराणसी से शुरू किया जा रहा है।

क्या है काम का बंटवारा?

इस पार्टनरशिप में दोनों कंपनियों ने अपनी ताकत के हिसाब से जिम्मेदारी तय की है। RPS Group जमीन, कंस्ट्रक्शन और शुरुआती कैपिटल पर ध्यान देगा, जबकि SeasonTwo Living एक ऑपरेटर के तौर पर हेल्थ, वेलनेस, हॉस्पिटल और कम्युनिटी मैनेजमेंट का जिम्मा संभालेगा। रियल एस्टेट में अब निर्माण और सर्विसिंग को अलग-अलग कंपनियां मिलकर पूरा कर रही हैं।

सीनियर लिविंग मार्केट का गणित

यह सामान्य हाउसिंग प्रोजेक्ट्स से बिल्कुल अलग है। यहां कमाई सिर्फ फ्लैट बेचने से नहीं, बल्कि लंबे समय तक चलने वाले सर्विस कॉन्ट्रैक्ट्स और मंथली मेंटेनेंस से होती है। हालांकि, इसमें चुनौतियां भी हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस सेक्टर में 'जेस्टेशन पीरियड' (काम शुरू होने और मुनाफे तक का समय) लंबा होता है।

बड़ी चुनौतियां और जोखिम

  1. ऑपरेशनल लागत: सीनियर लिविंग में स्किल्ड स्टाफ की जरूरत होती है, जिससे खर्च बढ़ सकता है। अगर रेजिडेंट्स की संख्या उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ती, तो कैश फ्लो पर सीधा असर पड़ेगा।
  2. रेगुलेटरी फ्रेमवर्क: भारत में बुजुर्गों की देखभाल से जुड़े नियम अभी विकसित हो रहे हैं, इसलिए कंप्लायंस का दबाव बना रहता है।
  3. समय और लागत: ट्रेडिशनल होम प्रोजेक्ट्स के मुकाबले इन प्रोजेक्ट्स को तैयार होने में अधिक समय लगता है, ऐसे में कंस्ट्रक्शन में देरी प्रोजेक्ट के रिटर्न पर असर डाल सकती है।
Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.