पुराना फ्लैट खरीदते समय पिछले मालिक का बकाया मेंटेनेंस या सोसाइटी चार्ज आपकी बड़ी मुसीबत बन सकता है। ऐसे में 'नो-ड्यूज सर्टिफिकेट' (No-Dues Certificate) लेना बेहद जरूरी है, ताकि प्रॉपर्टी ट्रांसफर के बाद आपको कोई अनचाहा वित्तीय बोझ न उठाना पड़े।
क्या आपकी प्रॉपर्टी पर है पुराना कर्ज?
अक्सर होमबायर्स को लगता है कि फ्लैट की चाबी मिलते ही उनकी जिम्मेदारी शुरू होती है, लेकिन हकीकत कुछ और है। हाउसिंग सोसाइटी के नियम और कानून अलग हो सकते हैं। हालिया जुलाई 2026 के बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले के मुताबिक, कई मामलों में सोसाइटी के बकाए फ्लैट के साथ ही जुड़े रहते हैं। इसका मतलब यह है कि मालिक बदलने के बावजूद, सोसाइटी नए खरीदार से बकाया वसूलने का कानूनी अधिकार रख सकती है। उत्तर प्रदेश अपार्टमेंट एक्ट 2010 जैसे नियम भी संयुक्त दायित्वों (Joint Liabilities) की बात करते हैं, जिससे यह साफ है कि कानूनी पेच काफी जटिल हो सकते हैं।
खुद को कैसे बचाएं (Buyer Protection Tips)
इस वित्तीय झटके से बचने का एकमात्र तरीका है—खरीद से पहले सख्ती से जांच-पड़ताल। विक्रेता की जुबानी बातों पर भरोसा न करें।
- नो-ड्यूज सर्टिफिकेट (NDC): सोसाइटी ऑफिस या रेजिडेंट्स एसोसिएशन से लिखित में NDC मांगें, जिस पर मुहर लगी हो।
- इंडेम्निटी क्लॉज (Indemnity Clause): अपनी सेल एग्रीमेंट (Sale Agreement) में स्पष्ट इंडेम्निटी क्लॉज शामिल करवाएं। इससे अगर बिक्री से पहले का कोई बकाया निकलता है, तो कानूनी रूप से विक्रेता को भुगतान करना होगा।
- लेजर वेरिफिकेशन: सिर्फ सर्टिफिकेट पर निर्भर न रहें, बल्कि खुद सोसाइटी के ऑफिस जाकर मेंटेनेंस लेजर और हालिया पेमेंट रिसीट्स को चेक करें।
याद रखें, घर की डील केवल टाइटल क्लियर करने तक सीमित नहीं है, बल्कि एक 'क्लीन लेजर' (Clean Ledger) सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है।
