बजट में 'सस्ते घर' की अनदेखी से रियल एस्टेट सेक्टर परेशान
31 जनवरी 2026 को पेश हुए Union Budget 2026 के बाद रियल एस्टेट शेयरों पर बड़ी गिरावट आई। इसी दिन Nifty Realty इंडेक्स 2% नीचे बंद हुआ। यह गिरावट पिछले चार दिनों की तेजी को खत्म करने वाली साबित हुई और निवेशकों की निराशा को साफ दर्शाती है। शेयर बाजार में रियल एस्टेट सेक्टर की इस नेगेटिव प्रतिक्रिया की मुख्य वजह बजट में किफायती (Affordable) यानी सस्ते आवास (Housing) सेगमेंट को लेकर ठोस उपायों की कमी रही।
इंडस्ट्री बॉडी ने जताई गहरी चिंता
रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CREDAI) ने बजट को लेकर काफी मायूसी जाहिर की है। CREDAI के राष्ट्रीय अध्यक्ष शेखर पटेल ने कहा कि बजट में सस्ते आवास के लिए कुछ भी नया या ठोस नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि पुरानी परिभाषाओं के चलते इस सेगमेंट की कुल सप्लाई में हिस्सेदारी मौजूदा अनुमानित 18% से घटकर केवल 12% रह सकती है। यह स्थिति निम्न और मध्यम आय वर्ग के लोगों के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर सकती है। ऐतिहासिक तौर पर, रियल एस्टेट सेक्टर बजट घोषणाओं के आसपास अक्सर कमजोर प्रदर्शन करता रहा है, और जनवरी 2026 में तो कुछ कंपनियों में भारी गिरावट देखी गई, जैसे Signature Global (India) 28% और Godrej Properties 22% तक गिरे।
प्रमुख रियल एस्टेट शेयरों में बड़ी गिरावट
इस व्यापक बिकवाली का असर यह रहा कि Nifty Realty इंडेक्स के दस में से आठ शेयर लाल निशान में बंद हुए। Lodha Developers और Sobha इस गिरावट में सबसे आगे रहे, दोनों ही कंपनियों के शेयर 5% तक टूट गए। Godrej Properties, DLF, Oberoi Realty और Signatureglobal (India) जैसे बड़े रियल एस्टेट डेवलपर्स के शेयरों में भी 5% तक की गिरावट देखी गई। यह गिरावट निवेशकों की बढ़ती चिंताओं को दिखाती है। गौरतलब है कि जनवरी 2026 में सेक्टर का प्रदर्शन वैसे भी कमजोर रहा था, जिसमें Signatureglobal 28%, Godrej Properties 22%, Oberoi Realty 11%, और DLF 8% तक गिर चुके थे। इसी महीने, PSU Banks में 11% और Metals सेक्टर में 15% का इजाफा हुआ था, जिसके मुकाबले रियल एस्टेट पीछे रह गया।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर, मगर शॉर्ट-टर्म में दर्द
तत्काल fallout के बावजूद, कुछ इंडस्ट्री के हितधारकों ने बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) के लिए किए गए भारी आवंटन को रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक संभावित लॉन्ग-टर्म पॉजिटिव संकेत बताया है। सरकार ने फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए पब्लिक कैपिटल एक्सपेंडिचर (Public Capital Expenditure) को बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ कर दिया है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर-आधारित विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड (Infrastructure Risk Guarantee Fund) जैसी पहलों से बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए फंड की उपलब्धता और एग्जीक्यूशन रिस्क कम होने की उम्मीद है। TREVOC Group के मैनेजिंग डायरेक्टर गुरपाल सिंह चावला ने 'सिटी इकोनॉमिक रीजन्स' (City Economic Regions) फ्रेमवर्क के जरिए टियर-2 और टियर-3 शहरों के लिए पॉजिटिव प्रभावों पर प्रकाश डाला। हालांकि, ANAROCK Group के चेयरमैन अनुज पुरी का मानना है कि रियल एस्टेट सेक्टर को सीधे तौर पर ज्यादा राहत नहीं मिली है, और फायदे अप्रत्यक्ष रूप से व्यापक आर्थिक पहलों से मिलेंगे। इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड से लेंडर्स के लिए कंस्ट्रक्शन फेज को डी-रिस्क करने और प्राइवेट कैपिटल को आकर्षित करने की उम्मीद है।
ऊंची वैल्यूएशन के बीच सेक्टर की कमजोरी
बजट की घोषणा के समय, कई रियल एस्टेट शेयरों का वैल्यूएशन (Valuation) पहले से ही काफी ऊंचा था। उदाहरण के लिए, 30 जनवरी 2026 तक Signatureglobal (India) का P/E रेशियो 162.64 था, जबकि Sobha का P/E 108.89 था। Lodha Developers का P/E 28.99 था। ये आंकड़े बताते हैं कि हालिया कमजोरी के बावजूद, निवेशकों की उम्मीदें काफी ऊंची बनी हुई थीं, जिससे सस्ते आवास के लिए खास समर्थन की कमी एक बड़ी निराशा बनकर उभरी।