वित्तीय वर्ष 2026 में, भारत की टॉप रियल एस्टेट कंपनियों जैसे DLF और Godrej Properties ने दमदार बिक्री दर्ज करने के बावजूद अपने वैल्यूएशन में भारी गिरावट देखी। निवेशक अब उन कंपनियों की ओर रुख कर रहे हैं जिनके बिजनेस मॉडल में रेंटल या हॉस्पिटैलिटी से लगातार कमाई होती है। Phoenix Mills और OYO जैसी कंपनियों ने इस गिरावट का रुख मोड़ा।
क्या है वजह? वैल्यूएशन में आई गिरावट
वित्तीय वर्ष 2026 (FY26) में भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में एक दिलचस्प तस्वीर देखने को मिली। कई बड़ी रियल एस्टेट कंपनियों ने शानदार परफॉर्मेंस, जबरदस्त बुकिंग्स और प्रॉफिट में बढ़ोतरी दर्ज की। लेकिन, इन सबके बावजूद उनके मार्केट वैल्यूएशन में कमी आई। यह गिरावट इस बात का संकेत है कि अब मार्केट सिर्फ रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स पर फोकस करने वाली कंपनियों को पहले जैसा भाव नहीं दे रहा है।
बड़े डेवलपर्स का वैल्यूएशन कैसा रहा?
इस दौरान, प्रमुख डेवलपर्स की मार्केट कैप में कमी आई। DLF, जो भारत की सबसे बड़ी लिस्टेड रियल एस्टेट कंपनी बनी हुई है, उसका वैल्यूएशन ₹1.46 लाख करोड़ रहा, जो पिछले साल से 29.3% कम है। Macrotech Developers (Lodha) का वैल्यूएशन 32.2% गिरकर ₹93,700 करोड़ पर आ गया।
Godrej Properties के वैल्यूएशन में 24.8% की गिरावट आई और यह ₹53,100 करोड़ रहा। Prestige Estates का मार्केट वैल्यू 17.9% घटकर ₹58,700 करोड़ हो गया, जबकि Oberoi Realty का वैल्यूएशन 9.7% गिरकर ₹62,700 करोड़ दर्ज किया गया। ये आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ अच्छी सेल्स ही अब स्टॉक वैल्यूएशन को बनाए रखने के लिए काफी नहीं हैं, खासकर जब मार्केट स्थिर कमाई वाली कंपनियों को ज्यादा तवज्जो दे रहा है।
डाइवर्सिफिकेशन ही है असली मंत्र
वहीं, जिन कंपनियों के बिजनेस मॉडल में एन्युटी-इनकम एसेट्स जैसे शॉपिंग मॉल्स, ऑफिस स्पेस और होटल शामिल हैं, उन्होंने बेहतर प्रदर्शन किया। Phoenix Mills का वैल्यूएशन 13.2% बढ़कर ₹63,300 करोड़ पर पहुंच गया। कंपनी के मिक्स्ड-यूज़ डेवलपमेंट और रिटेल एसेट्स से मिलने वाला लगातार रेंटल इनकम, निवेशकों को पसंद आ रहा है।
OYO ब्रांड के तहत काम करने वाला हॉस्पिटैलिटी प्लेटफॉर्म Prism का वैल्यूएशन दोगुना से भी ज्यादा होकर ₹67,200 करोड़ हो गया। इससे पता चलता है कि निवेशक अब हॉस्पिटैलिटी और सर्विस-बेस्ड बिजनेस मॉडल में भी दिलचस्पी दिखा रहे हैं, खासकर जब वे बेहतर प्रॉफिटेबिलिटी दर्शा रहे हों। Adani Properties का वैल्यूएशन भी 72.5% की भारी बढ़ोतरी के साथ बढ़ा है, जिसका मुख्य कारण उनके री-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स की आक्रामक पाइपलाइन है। हालांकि, Adani Properties एक अनलिस्टेड कंपनी है, इसलिए यह सीधे बाजार की दैनिक भावनाओं से प्रभावित नहीं होती।
निवेशकों की बदलती प्राथमिकताएं
मार्केट में एक बड़ा ट्रेंड यह दिख रहा है कि निवेशक अब ऐसी कंपनियों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं जो रियल एस्टेट डेवलपमेंट के साथ-साथ लगातार कैश फ्लो जेनरेट करने वाले एसेट्स को भी मैनेज करती हैं। रेजिडेंशियल प्री-सेल्स पर निर्भर रहने वाली कंपनियों के लिए इंटरेस्ट रेट्स और डिमांड साइकिल का असर ज्यादा रहता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या केवल रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स पर फोकस करने वाली कंपनियां भी कमर्शियल, रिटेल या हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में डाइवर्सिफाई करती हैं ताकि वे अपने रिस्क को कम कर सकें और बेहतर वैल्यूएशन हासिल कर सकें।
