9 सितंबर, 2026 को हुई एक कॉन्फ्रेंस में रियल एस्टेट दिग्गजों ने घरों की बढ़ती कीमतों पर चिंता जताई है। डेवलपर्स ने लागत घटाने के लिए सिंगल-विंडो क्लीयरेंस और लैंड रिकॉर्ड के डिजिटलाइजेशन की मांग रखी है, ताकि प्रोजेक्ट्स में देरी न हो और निवेशकों का मुनाफा सुरक्षित रहे।
प्रशासनिक सुस्ती और चुनौतियां
'नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन रियल एस्टेट फॉर विकसित भारत' में उद्योग जगत के दिग्गजों ने साफ कहा कि घरों की बढ़ती कीमतें अब आम आदमी की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं। CII रियल एस्टेट कमेटी के Ashwinder R. Singh और नेशनल काउंसिल ऑन रियल एस्टेट के Pradeep Aggarwal ने इस बात पर जोर दिया कि प्रशासनिक देरी के कारण प्रोजेक्ट्स की लागत हर गुजरते महीने के साथ बढ़ती जा रही है।
क्यों जरूरी है सिंगल-विंडो सिस्टम?
वर्तमान में एक प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए कई स्तरों पर मंजूरी लेनी पड़ती है। इंडस्ट्री की मांग है कि पूरे देश में एक 'सिंगल-विंडो क्लीयरेंस' सिस्टम लागू हो, जिससे समय की बचत हो और डेवलपर्स का ब्याज का बोझ कम हो। इसके साथ ही, भूमि रिकॉर्ड का डिजिटल होना पारदर्शिता लाएगा, जिससे टाइटल वेरिफिकेशन में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा। निवेशकों के लिए इसका सीधा मतलब है—तेज प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन और बेहतर कैश फ्लो।
प्रोजेक्ट की वायबिलिटी पर असर
जमीन की बढ़ती कीमतों के बीच डेवलपर्स पर दाम काबू में रखने का भारी दबाव है। यदि सरकारी हस्तक्षेप नहीं हुआ, तो डिमांड में बड़ी गिरावट देखी जा सकती है, जो शेयरहोल्डर्स के लिए चिंता का विषय है। इसके अलावा, कंपनियां अब 'ग्रीन-सर्टिफाइड' और एनर्जी-एफिशिएंट बिल्डिंग्स की ओर बढ़ रही हैं, जिसमें शुरुआती इन्वेस्टमेंट अधिक है। ऐसे में रेगुलरिटी रिफॉर्म्स ही सेक्टर की प्रॉफिटेबिलिटी को सहारा दे सकते हैं। अब बाजार की नजर इस बात पर है कि सरकार इन प्रस्तावों पर क्या रुख अपनाती है।
