रेडी-टू-मूव या अंडर-कंस्ट्रक्शन घर? जानिए कौन सा पड़ेगा सस्ता!

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AuthorAditya Rao|Published at:
रेडी-टू-मूव या अंडर-कंस्ट्रक्शन घर? जानिए कौन सा पड़ेगा सस्ता!

घर खरीदने का फैसला सिर्फ प्रॉपर्टी की कीमत पर निर्भर नहीं करता, बल्कि आपके फाइनेंस पर भी गहरा असर डालता है। रेडी-टू-मूव घर तुरंत पज़ेशन देते हैं, वहीं निर्माणाधीन प्रॉपर्टी में RERA स्टेटस और देरी के जोखिम का ध्यान रखना ज़रूरी है। किराए, लोन के ब्याज और छिपे हुए खर्चों को तौलकर ही सही डील चुनें।

रेडी-टू-मूव प्रॉपर्टी: तुरंत फायदा, कम झंझट

रेडी-टू-मूव प्रॉपर्टी में घर खरीदार को तुरंत रहने की सुविधा मिलती है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको होम लोन का ब्याज भरते हुए अलग से किराया नहीं देना पड़ता। आप प्रॉपर्टी, कॉमन एरिया और आसपास के इलाके का खुद निरीक्षण कर सकते हैं, जिससे कंस्ट्रक्शन क्वालिटी को लेकर अनिश्चितता खत्म हो जाती है।

हालांकि, इन प्रॉपर्टी की कीमत निर्माणाधीन यूनिट्स से ज़्यादा हो सकती है, लेकिन इनमें प्रोजेक्ट में देरी या ब्याज के भुगतान का वित्तीय जोखिम नहीं होता। खरीदारों को रजिस्ट्रेशन चार्ज, स्टाम्प ड्यूटी और मेंटेनेंस डिपॉजिट जैसे खर्चों को भी बजट में शामिल करना होगा।

निर्माणाधीन प्रॉपर्टी: शुरुआती कीमत कम, पर जोखिम ज़्यादा?

निर्माणाधीन प्रॉपर्टी अक्सर खरीदारों को कम शुरुआती कीमत और यूनिट्स के ज़्यादा विकल्प के कारण आकर्षित करती हैं। कंस्ट्रक्शन के स्टेज के हिसाब से पेमेंट प्लान भी शुरुआती कैश फ्लो को आसान बना सकते हैं।

लेकिन, इन फायदों के साथ प्रोजेक्ट में देरी का बड़ा जोखिम जुड़ा होता है, जिससे अप्रत्याशित खर्चे बढ़ सकते हैं। अगर प्रोजेक्ट समय पर डिलीवर नहीं होता, तो खरीदार को रेंटल एग्रीमेंट बढ़ाना पड़ सकता है या होम लोन पर ज़्यादा ब्याज देना पड़ सकता है, जिससे प्रॉपर्टी की कुल लागत काफी बढ़ जाती है।

RERA वेरिफिकेशन का महत्व

भारत में घर खरीदारों की सुरक्षा के लिए रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट, यानी RERA, एक महत्वपूर्ण रेगुलेटरी फ्रेमवर्क है। निर्माणाधीन प्रोजेक्ट में निवेश करने से पहले, खरीदारों को RERA पोर्टल पर प्रोजेक्ट के रजिस्ट्रेशन स्टेटस की जांच ज़रूर करनी चाहिए।

इस पोर्टल पर प्रोजेक्ट की अनुमानित कंप्लीशन डेट, ज़रूरी सरकारी अप्रूवल और डेवलपर के खिलाफ किसी भी पुराने मुकदमे या शिकायत जैसी महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है। RERA के नियमों के मुताबिक, डेवलपर्स को खरीदारों से मिले 70% फंड एक अलग प्रोजेक्ट अकाउंट में रखने होते हैं, ताकि पैसा केवल उसी कंस्ट्रक्शन के लिए इस्तेमाल हो, जिससे फंड डायवर्जन का जोखिम कम हो जाता है।

कुल लागत का सही आकलन

दोनों विकल्पों की तुलना करते समय, खरीदारों को एक विस्तृत कॉस्ट ब्रेकडाउन तैयार करना चाहिए। निर्माणाधीन घरों के लिए, इस विश्लेषण में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) शामिल होना चाहिए, जो आमतौर पर ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट मिल चुके रेडी-टू-मूव घरों पर लागू नहीं होता।

इसके अलावा, खरीदारों को संभावित किराया, लोन के ब्याज का बोझ, इंटीरियर फिनिशिंग की लागत और मनी के टाइम वैल्यू जैसे कारकों पर भी विचार करना चाहिए। यह फैसला सिर्फ बेस प्राइस के आधार पर नहीं, बल्कि खरीदार की वित्तीय क्षमता, प्रोजेक्ट की प्रगति की निगरानी करने की क्षमता और घर की तत्काल आवश्यकता पर आधारित होना चाहिए। प्रोजेक्ट माइलस्टोन को ट्रैक करना और डेवलपर के साथ स्पष्ट कम्युनिकेशन बनाए रखना, उन खरीदारों के लिए ज़रूरी कदम हैं जो निर्माणाधीन प्रॉपर्टी का रास्ता चुनते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.