JDA मॉडल: मुनाफे का नया इंजन
Raymond Realty के लिए यह तिमाही बेहद खास रही, जिसका मुख्य कारण रहा उनका एसेट-लाइट जॉइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट (JDA) मॉडल। इस स्ट्रैटेजी की बदौलत कंपनी ने सिर्फ भारी मुनाफा ही नहीं कमाया, बल्कि अपने पोर्टफोलियो का तेजी से विस्तार भी किया है, वो भी बिना ज्यादा कर्ज लिए या कैपिटल खर्च बढ़ाए।
रिकॉर्ड नतीजे: आंकड़े क्या कहते हैं?
मार्च तिमाही (Q4) में कंपनी का नेट प्रॉफिट पिछले क्वार्टर के ₹67 करोड़ से करीब 140% बढ़कर ₹161 करोड़ पर पहुंच गया। वहीं, रेवेन्यू में 52.7% की शानदार ग्रोथ के साथ यह ₹1,156.8 करोड़ रहा। EBITDA भी दोगुना से ज्यादा होकर ₹234.3 करोड़ पर पहुंच गया, जिससे कंपनी का मार्जिन बढ़कर 20.3% हो गया, जो पिछले क्वार्टर में 12.1% था। यह सब JDA मॉडल की देन है, जो शुरुआत में कैपिटल कॉस्ट बचाता है और प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करने में मदद करता है।
डिविडेंड और बढ़ा पोर्टफोलियो
कंपनी ने इस बेहतरीन परफॉर्मेंस के साथ फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) के लिए ₹2 प्रति शेयर का डिविडेंड भी प्रस्तावित किया है। इसके अलावा, कंपनी का ग्रॉस डेवलपमेंट वैल्यू (GDV) वाला पोर्टफोलियो अब करीब ₹42,000 करोड़ का हो गया है। हाल ही में मुंबई के कांदिवली में ₹3,000 करोड़ का एक नया JDA प्रोजेक्ट जुड़ने से इसमें और मजबूती आई है। CEO हरीमोहन साहनी का कहना है कि FY26 में कंपनी बड़े पैमाने पर एग्जीक्यूशन पर ध्यान देगी, जिसके संकेत Q4 में ₹1,519 करोड़ की प्री-सेल्स से मिलते हैं।
आगे की राह और चुनौतियाँ
JDA-केंद्रित स्ट्रैटेजी Raymond Realty को रियल एस्टेट मार्केट में एक अलग पहचान देती है। हालांकि, इस मॉडल में साझेदार (लैंडओनर) पर निर्भरता के चलते प्रोजेक्ट अप्रूवल में देरी या विवाद जैसी जटिलताएं आ सकती हैं। कंपनी के ₹43,000 करोड़ के GDV पाइपलाइन को सफल बनाने के लिए मजबूत प्रोजेक्ट मैनेजमेंट की जरूरत होगी। इसके अलावा, डिविडेंड के तौर पर दिया जाने वाला पैसा JDA अधिग्रहण या कंस्ट्रक्शन में इस्तेमाल हो सकता है। रियल एस्टेट सेक्टर की चक्रीय प्रकृति (cyclical nature) भी एक जोखिम है, जिससे कंपनी को सावधान रहना होगा।
