RERA के 10 साल: घर खरीदारों का संघर्ष जारी, पजेशन के लिए अभी भी लंबी लड़ाई

REAL-ESTATE
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
RERA के 10 साल: घर खरीदारों का संघर्ष जारी, पजेशन के लिए अभी भी लंबी लड़ाई

Real Estate (Regulation and Development) Act (RERA) को लागू हुए एक दशक हो चुका है, लेकिन एक नई रिपोर्ट के मुताबिक घर खरीदारों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। प्रोजेक्ट्स में देरी और मुआवजे की कम वसूली के कारण खरीदार आज भी परेशान हैं।

RERA का एक दशक: हकीकत क्या है?

साल 2016 में RERA कानून आने का मकसद बिल्डर्स और खरीदारों के बीच के असंतुलन को ठीक करना था। लेकिन 'Forum for People’s Collective Efforts (FPCE)' की 2026 की रिपोर्ट बताती है कि स्ट्रक्चरल कमियों के कारण आज भी खरीदार जोखिम में हैं। मुख्य समस्या यह है कि रेगुलेटर्स अक्सर खरीदारों से सलाह लिए बिना ही बिल्डर्स को प्रोजेक्ट एक्सटेंशन दे देते हैं। नतीजतन, बिल्डर को तो काम पूरा करने का ज्यादा समय मिल जाता है, लेकिन खरीदार बिना किसी फाइनेंशियल रिलीफ के पजेशन का इंतजार करता रहता है।

मुआवजे की वसूली एक चुनौती

अगर कानून के 'Section 18' के तहत खरीदार मुआवजा जीत भी जाता है, तो पैसा वसूलना किसी जंग से कम नहीं है। जनवरी 2026 के आंकड़ों के अनुसार, कर्नाटक में रेवेन्यू रिकवरी सर्टिफिकेट्स के जरिए खरीदारों को मिलना वाला पैसा केवल 9.8% ही वसूल हो पाया है। कानूनी आदेश और हकीकत के बीच का यह गैप बिल्डर्स को जवाबदेह बनाने में बड़ी बाधा है।

पेमेंट और कंस्ट्रक्शन में बड़ा फासला

रिपोर्ट के मुताबिक, बिल्डर्स निर्माण रुकने के बावजूद खरीदारों से पेमेंट की डिमांड जारी रखते हैं। ऐसे में खरीदार बड़ी रकम चुकाने के बाद भी साइट पर कोई काम नहीं देखता। अब सरकार 'RERA 2.0' रिफॉर्म्स पर जोर दे रही है, जिसमें आर्किटेक्ट्स और इंजीनियर्स की तरफ से डिजिटल प्रोग्रेस रिपोर्ट अनिवार्य होगी। साथ ही, 70% एस्क्रो अकाउंट (Escrow Account) के नियमों को और सख्त बनाया जा रहा है।

हाल ही में 'Ministry of Housing and Urban Affairs' ने पश्चिम एशिया के संघर्ष (West Asia conflict) के कारण सप्लाई चेन में आई रुकावटों के चलते प्रोजेक्ट्स को 4 महीने की एक्स्ट्रा मोहलत भी दी थी। कुल मिलाकर, कानूनी सुरक्षा के बावजूद अब भी खरीदारों को खुद अपनी ड्यू-डिलिजेंस (Due Diligence) करने और प्रोजेक्ट की वित्तीय सेहत पर नजर रखने की सख्त जरूरत है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.